लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका का सशक्त, जागरूक और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग होना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय संविधान ने विधायिका को महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की हैं और एक विधायक की सबसे बड़ी पहचान विधानसभा से ही बनती है। उन्होंने कहा कि सहमति, असहमति, संवाद और सार्थक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत करती है।
संसदीय परंपराओं को लेकर दिया बड़ा बयान
रविवार को बिहार के गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) परिसर में बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित एवं वर्तमान सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ को संबोधित करते हुए महाना ने संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रियाओं तथा जनप्रतिनिधियों के दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक है, जहां सत्ता का संचालन जनता के मत यानी बैलेट की ताकत से होता है।
लोकतंत्र के चारों स्तंभों की अपनी-अपनी संवैधानिक भूमिका, सीमाएं और जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। टकराव तभी उत्पन्न होता है, जब कोई संस्था दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का प्रयास करती है। इसलिए सभी संस्थाओं को संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
READ MORE: दिल्ली से लखनऊ पहुंची सत्याग्रह पदयात्रा, पेपर लीक के खिलाफ इको गार्डन में प्रदर्शन
महाना ने जनप्रतिनिधि और जनता के बीच विश्वास को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि जनता से ऐसे वादे नहीं करने चाहिए जिन्हें पूरा करना संभव न हो। उन्होंने कहा कि जनहित के कार्यों के लिए ईमानदारी, निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ लगातार प्रयास करना ही जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व है। जब जनता को यह भरोसा होता है कि उसका प्रतिनिधि उसके हितों के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होती है।
READ MORE: राज्यपाल ने जन भवन में किया सफेद चंदन का पौधरोपण, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
उन्होंने विधानसभा की समितियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करना, अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करना और जनहित के मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश देना समितियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में जनप्रतिनिधियों का अध्ययनशील, जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम होना आवश्यक है, ताकि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतर सकें।
READ MORE: अंतिम चरण में राम मंदिर का निर्माण, कथा संग्रहालय योजना को मिली मंजूरी
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

