मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. कहते हैं सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगी, लेकिन तारुन ब्लॉक के एक गांव की तस्वीर इस दावे को झुठलाती नजर आ रही है. विकासखंड तारुन अंतर्गत ग्राम पंचायत घोंपा के मजरे पकड़ियहरा में गरीबी का दंश झेल रहे 45 वर्षीय मजदूर रामजीत गौड़ की उचित इलाज के अभाव में घर पर ही मौत हो गई. वह हफ्तों से वायरल फीवर से पीड़ित था.
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परिजनों के अनुसार रामजीत के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे. उसने कुछ लोगों से कर्ज लेकर स्थानीय चिकित्सकों और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन बीमारी बढ़ती गई. आखिरकार 18 सितंबर को जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते-लड़ते उसने घर पर ही दम तोड़ दिया. मौत के बाद गांव वालों ने आपसी सहयोग से उसका अंतिम दाह संस्कार कराया.
मृतक के पीछे पत्नी पिंकी देवी के अलावा सात बच्चे हैं. बड़ी बेटी रोशनी की शादी हो चुकी है. अन्य बच्चों में सूरज (18 वर्ष), किशन (16 वर्ष), राज (14 वर्ष), रजनीश (11 वर्ष), सलोनी (8 वर्ष) और अंजू (5 वर्ष) शामिल हैं. पिता की मौत के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है.
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वहीं परिवार की माली हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह आज भी छप्पर-पल्ली के नीचे जीवन बिताने को मजबूर है. बच्चों को केंद्र औऱ प्रदेश सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. खाने-पीने तक के लिए परिवार को ग्रामीणों और कुछ समाजसेवियों की मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है.



