गोविंद पटेल, कुशीनगर. जनपद में बीते करीब दो सप्ताह के भीतर चाकूबाजी और धारदार हथियारों से हमले की लगातार सामने आई घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. महज 10-12 दिनों में हत्या और जानलेवा हमलों की आधा दर्जन वारदातों ने आम लोगों में दहशत फैला दी है. कहीं मामूली विवाद में चाकू चले, तो कहीं पुरानी रंजिश और आपसी विवाद खून-खराबे में बदल गए. लगातार हो रही इन घटनाओं से यह सवाल उठने लगा है कि आखिर अपराधियों में पुलिस का खौफ क्यों नहीं रह गया है.
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सबसे सनसनीखेज वारदात 2 अगस्त को तमकुहीराज थाना क्षेत्र के चखनी खास गांव में हुई, जहां 16 वर्षीय आदर्श चौहान की पीट-पीटकर और पेट में चाकू मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया. पुलिस ने पांच नामजद समेत नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. इसके एक दिन पहले 1 अगस्त को विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तिलकपट्टी चौराहे के पास बाइक सवार अब्दुल पर अज्ञात बदमाशों ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में उपचार चल रहा है और पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है.
27 जुलाई को कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के जंगल पंचरुखिया धनुष टोली के पास गंडक नहर किनारे हीरालाल की धारदार हथियार से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर घटना का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. जांच में ब्लैकमेलिंग और आपसी विवाद हत्या की वजह बताई गई. 23 जुलाई को रामकोला थाना क्षेत्र के कठिनइयां गांव में एक व्यक्ति पर सोते समय चाकू से हमला किया गया. गंभीर रूप से घायल पीड़ित की इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
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इसी क्रम में जुलाई के अंतिम सप्ताह में कसया थाना क्षेत्र के वाल्मीकिनगर, बरवा जंगल में विवाद के दौरान रामअशीष और उनके पुत्र विकास राजभर पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है. बाजारों, कस्बों और गांवों में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. चाकूबाजी और हत्या की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि अपराधियों के हौसले अब भी बुलंद हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल गिरफ्तारी पर्याप्त है या फिर ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाने के लिए पुलिस को अपनी रणनीति और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना होगा.


