लखनऊ. एसआईआर को लेकर सियासी पारा गरमाया हुआ है. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की 9 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति ने फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही इसके दुरुपयोग की आशंकाओं को भी गंभीर बना दिया है.

इसे भी पढ़ें- सत्ता में हैं तो नियम गया ‘तेल’ लेने! BJP नेताओं की गाड़ियों के कटे धड़ाधड़ चालान, पुलिस से की तू-तू, मैं-मैं, VIDEO वायरल

जारी आंकड़ों के अनुसार, 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 (लगभग 98.5%) में नाम हटाने का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था. इसके अलावा, SIR की निर्धारित समयसीमा के बाद दाखिल 1,10,476 विलोपन अनुरोधों और एक ही व्यक्ति द्वारा कई मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन करने के मामलों पर भी सवाल उठे हैं.

तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्रों में विलोपन अनुरोधों में लगभग 90% मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित होने की बात सामने आई है. तरबगंज में ‘रेशमा’ नाम से एक ही दिन, एक ही बूथ के 188 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया है. इसके अलावा, 198 ऐसे मामलों का उल्लेख है, जिनमें एक व्यक्ति के नाम से 10 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए गए और कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास हुआ. निर्वाचन कार्यालय ने इन मामलों को सीमित बताते हुए कहा है कि प्रदेश में लाखों आवेदनों की तुलना में इनकी संख्या बहुत कम है. मामलों की संख्या कम बताकर गंभीर सवालों को खारिज नहीं किया जा सकता.

इसे भी पढ़ें- कुर्सी संभालते ही आराधना मिश्रा का बड़ा दांव, 2027 के लिए तय कर दिया कांग्रेस का ‘मिशन लखनऊ’

इससे पहले, बिना कानून मंत्रालय की अनुमति के फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के मामले में निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि यह बदलाव माननीय उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद किया गया था. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अब SIR से पहले वाला पुराना फॉर्म-6 ही मान्य होगा और जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन 5 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को न्यायालय ने मंजूरी नहीं दी थी. मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ और देश की जनता को गुमराह करने वाले ऐसे लोकतंत्रद्रोही कृत्य को देशवासी कभी माफ़ नहीं करेंगे.