प्रयागराज. उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई हुई. अदालत ने OBC आयोग की रिपोर्ट पर असंतोष जताया है. न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट फील्ड में जाकर नहीं बनाई गई है. दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने पर कोर्ट ने आयोग पर सवाल उठाए हैं.

न्यायालय में पंचायत चुनाव से जुड़ी 11 याचिकाओं पर सुनवाई हुई. समय से चुनाव कराने की मांग पर याचिकाएं दाखिल की गई थी. योगी सरकार के 25 मई के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी. सभी याचिकाओं को हाईकोर्ट ने एक साथ संबद्ध किया. मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.

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बता दें कि बीते 18 मई को योगी कैबिनेट को बैठक में आयोग के गठन को मंजूरी दी गई थी. जिसके बाद अब कमिशन का गठन किया गया. गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद आयोग का गठन किया गया था. उसकी रिपोर्ट पर ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर फैसला होना था.

आयोग का पहला काम आंकड़े जुटाना था. जिसमें स्थानीय निकायों (ब्लॉक और पंचायत स्तर पर) में पिछड़ी जातियों की आबादी की गणना, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पता लगाना था. आयोग यह सुनिश्चित करता कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तीनों को मिलाकर कुल आरक्षण 50% से ज्यादा न हो. आयोग की सिफारिशों के आधार पर हर स्थानीय निकाय में ओबीसी आबादी के अनुपात के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या तय की जाती. आयोग ही आरक्षण का अनुपात तय करता.