लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 85,854 मतदाताओं के नाम ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर से फॉर्म-7 के जरिए काटे जाने के दावे को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने खारिज किया है. कार्यालय ने इस खबर को भ्रामक बताते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया तय नियमों और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई. प्रेस नोट में रिपोर्ट के कई दावों पर आपत्ति जताई गई है.

इसे भी पढ़ें- अखिलेश जी, 865 करोड़ में आपके जेब में कितना गया? ओपी राजभर JPNIC को लेकर सपा सुप्रीमो को घेरा, पूछे तीखे सवाल

3.26 करोड़ मतदाताओं को जारी किए गए थे नोटिस

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में करीब 12.55 करोड़ मतदाता शामिल थे. इनमें से लगभग 3.26 करोड़ मतदाताओं को नो-मैपिंग और अन्य त्रुटियों के कारण नोटिस जारी किए गए थे. इन मतदाताओं को 27 मार्च 2026 तक आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया. इसके बाद दस्तावेजों की जांच के आधार पर नाम शामिल रखने या हटाने का फैसला लिया गया.

अयोग्य मतदाताओं के लिए जनरेट हुए फॉर्म-7

कार्यालय ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के दस्तावेज सही पाए गए, उनके नाम सूची में रखे गए. वहीं, अयोग्य पाए गए लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए. इसी प्रक्रिया के तहत सॉफ्टवेयर में फॉर्म-7 जनरेट करने की व्यवस्था थी, ताकि भविष्य में यह पता लगाया जा सके कि किसी मतदाता का नाम कब और किस कारण हटाया गया. कार्यालय के अनुसार, 85,854 का आंकड़ा अयोग्य पाए गए मतदाताओं से संबंधित है.

बल्क में नाम कटवाने के सभी बताए गए मामले निरस्त

रिपोर्ट में तरबगंज और पीलीभीत में विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश का भी उल्लेख किया गया था. इस पर निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा कि रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर दिए गए सभी संबंधित फॉर्म-7 निरस्त कर दिए गए थे. कार्यालय के मुताबिक, वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म-7 की जांच में 198 ऐसे मामले मिले, जिनमें एक व्यक्ति ने 10 से अधिक फॉर्म भरे थे. इन मामलों में कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास हुआ.

इसे भी पढ़ें- नदी निगल गई जिंदगीः सरयू में नहाते वक्त डूबे 2 युवक, मची चीख-पुकार, एक की मौत, जानिए कैसे बची दूसरे की जान…

तीन घंटे में जवाब मांगने पर भी जताई आपत्ति

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा कि SIR से जुड़े दिशा-निर्देश निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. साथ ही, आरोप लगाया कि 8 अक्टूबर को दोपहर 3:32 बजे भेजे गए सवालों के जवाब उसी दिन शाम 7 बजे तक मांगे गए थे. कार्यालय ने कहा कि इतने कम समय में विस्तृत जानकारी देना संभव नहीं था. उसने रिपोर्ट को चुनाव आयोग की छवि खराब करने वाला बताया है.