कुंंदन कुमार/पटना। बिहार की सियासत में विधान परिषद चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। एनडीए (NDA) गठबंधन ने 10 में से 9 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है, लेकिन इस सूची में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष और सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का कोई नाम शामिल न होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
लालू परिवार की सुरक्षा और NDA की रणनीति
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत करते हुए लालू परिवार की सुरक्षा के मुद्दे पर राज्य सरकार का बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार ने मानकों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था की है। इसके बाद वे ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं, इसका जवाब राजद के नेता ही दे सकते हैं। हालांकि, उनका पूरा ध्यान फिलहाल आगामी विधान परिषद चुनावों पर केंद्रित है।
9 सीटों की घोषणा, 10वीं सीट पर सस्पेंस
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए ने अपने 9 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान मंत्री दीपक प्रकाश का नाम इस सूची में शामिल नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष के पास कुल 41 वोट हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे में 10वीं सीट को लेकर एनडीए की रणनीति क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या दरकिनार किए जा रहे हैं उपेंद्र कुशवाहा?
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को इन 9 सीटों में तरजीह न मिलना उनके समर्थकों के लिए चिंता का विषय है। क्या एनडीए 10वीं सीट पर दीपक प्रकाश या रालोमो के किसी अन्य चेहरे को उतारने की तैयारी में है, या फिर यह गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरियों का संकेत है? कुशवाहा ने इस सवाल पर चुप्पी साधते हुए कहा कि सब कुछ समय आने पर सामने आ जाएगा।
फिलहाल, गेंद एनडीए के पाले में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एनडीए नेतृत्व उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी को दूर करने के लिए उन्हें समायोजित करता है या फिर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।

