UPI MDR Charge: इस वक्त की बहुत बड़ी खबर सामने आई है। यूपीआई पर चार्ज लगाने का फैसला दिवाली तक टल गया है। मोदी सरकार (Modi government) ने फेस्टिव सीजन को देखते हुए यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिलहाल टाल दिया है। ₹2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से एमडीआर चार्ज लागू होने वाला था। इसमें 0.4% चार्ज लगना था। हालांकि अब मोदी सरकार ने यू-टर्न लेते हुए एमडीआर को दिवाली तक टाल दिया है।

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई (NPCI) ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है। NPCI ने कहा है कि इसे दीवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, लेकिन अभी तारीख नहीं बताई है।

देश के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई का संचालन करने वाली संस्था एनपीसीआई ने अपने बयान में कहा है कि त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को रोका गया है। नई तारीख का ऐलान बाद में किया जाएगा। माना जा रहा है कि दिवाली के बाद नवंबर के दूसरे हफ्ते में इसे लेकर कोई नया फैसला आ सकता है।

करोड़ों व्यापारियों को राहत मिली

सरकार का यह फैसला त्योहारी सीजन में करोड़ों व्यापारियों के लिए राहत देने वाली है। ये फेस्टिव सीजन में व्यापारियों के लिए एक बड़ी खबर है, क्योंकि इनके लिए दिवाली, दशहरा, नवरात्रि समेत अन्य त्योहारों पर बाजार में कारोबार का सबसे बड़ा मौका होता है। इसे देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI की ओर से भी लगातार व्यापार पर बड़ी चोट लगने का हवाला देते हुए इसे टालने की डिमांड की जा रही थी।

UPI MDR का फ्लैट रेट मॉडल
इसके अलावा नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, पांच यूपीआई पेमेंट कैटेगरी को फ्लैट-रेट- मॉडल (UPI MDR Flat Rate Model) के तहत रखा गया है यानी पेमेंट कितना भी हो एक समान चार्ज लागू होगा। इसके लिए सरकार ने प्रति लेनदेन 5 रुपये की रियायती दर सेट की है। इसका सीधा मतलब है कि UPI Payment भले ही 2000 रुपये से ज्यादा या फिर 10,000 रुपये या इससे अधिक का क्यों न हो, MDR 5 रुपये ही रहेगा।

समझिए एमडीआर चार्ज का पूरा गणित

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR, यह वह फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार डेबिट/क्रेडिट कार्ड या डिजिटल पेमेंट (UPI) की सुविधा यानी पॉइंट ऑफ सेल मशीन या पेमेंट गेटवे का उपयोग करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है। यह फीस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क को सही से चलाने की लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। यह चार्ज व्यापारी को देना होता है, ग्राहक को नहीं।

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