एक ऐसा भी समय था जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना बना रहे थे जिससे कि रूस दुनिया के कई देशों से अलग-थलग पड़ जाए. आज का एक ऐसा समय है जब अमेरिका ने अपने ही NATO सहयोगियों को निजी बातचीत में रूस से जुड़े खतरों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयम बरतने की अपील की है.

यह सलाह यूक्रेन युद्ध पर नई अमेरिकी बातचीत, यूरोप की सुरक्षा चिंताओं और अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा के बीच आई है.

अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के अधिकारियों ने यूरोपीय नेताओं को रूस के खिलाफ उकसावे वाली बयानबाजी करने से बचने के लिए कहा है. अमेरिका की ओर से यह संदेश पाने वाले देशों में लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया समेत कई देश हैं. जिसे अमेरिका ने रूस के खतरे को लेकर सार्वजनिक रूप से बोलते समय संयम बरतने की बात कही है. पेंटागन के अधिकारियों ने NATO के कुछ सदस्य देशों से कहा है कि मॉस्को के खतरे पर चर्चा करते समय ऐसी भाषा से बचें, जिससे तनाव और बढ़ सकता है.

हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि पेंटागन की ओर से यह हिदायत बाल्टिक देशों के अलावा और किन यूरोपीय सरकारों को दी गई है.

अमेरिका का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बातचीत के जरिए यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयास तेज कर रहा है. पांचवें साल में पहुंच चुके इस संघर्ष को खत्म करने के लिए वॉशिंगटन ने नई राजनयिक पहल शुरू की है.

NATO के भीतर रूस से पैदा होने वाले खतरे को सार्वजनिक रूप से पेश करने के तरीके को लेकर मतभेद हैं. कुछ अधिकारियों का मानना है कि रूस को लेकर लगातार चेतावनी देने से मॉस्को को डर का माहौल बनाने का मौका मिलता है. इस मामले पर पेंटागन के एक अधिकारी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा- सहयोगी देशों के बीच हुई निजी बातचीत निजी ही रहती है, इसलिए हम इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

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