नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने संभावित आपदा जोखिमों को लेकर निगरानी और तैयारी बढ़ाने पर जोर दिया है. आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों, नदियों और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.

देहरादून. नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी संभावित आपदा जोखिमों को लेकर निगरानी और तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया है. आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील प्रदेश है और सरकार संभावित जोखिमों को कम करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि नेपाल में हाल में हुई आपदा से सीख लेते हुए प्रदेश की ग्लेशियर झीलों, नदियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है.

निगरानी व्यवस्था मजबूत

मदन कौशिक के अनुसार संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और नियमित मॉनीटरिंग की जाएगी. इसके साथ ही अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त उपकरण और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि संभावित खतरे की सूचना समय रहते प्रशासन और आमजन तक पहुंचाई जा सके.

जन सुरक्षा प्राथमिकता

आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जन-जीवन की सुरक्षा है. आपदा से पहले की तैयारी, समय पर चेतावनी, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए संभावित जनहानि को न्यूनतम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

मानसून के दौरान सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सतर्क रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

जिलों की समीक्षा

नेपाल में आपदा के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठकें कीं. समीक्षा के दौरान ग्लेशियर झीलों के साथ नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थलों, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार व्यवस्था और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों का जायजा लिया गया.

सभी जिलों के डीएम को संभावित रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने और किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए गए हैं.