उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 14 छोटी जल विद्युत परियोजनाओं पर काम शुरू किया है. इन परियोजनाओं से करीब 165 मेगावाट बिजली उत्पादन और 8 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
देहरादून. उत्तराखंड में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने छोटी जल विद्युत परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है. बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के विरोध और कानूनी अड़चनों के बीच सरकार फिलहाल 14 छोटी परियोजनाओं की संभावनाओं पर होमवर्क कर रही है. इन परियोजनाओं के जरिए करीब 165 मेगावाट बिजली उत्पादन की उम्मीद है.
छोटी परियोजनाओं पर फोकस
राज्य सरकार ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जल विद्युत के साथ सौर ऊर्जा और थर्मल पावर जैसे विकल्पों पर भी काम कर रही है. हालांकि, प्रदेश में नदियों की मौजूदगी के कारण जल विद्युत परियोजनाओं को यहां ऊर्जा उत्पादन की महत्वपूर्ण संभावना के तौर पर देखा जा रहा है.
उत्तराखंड में पहले से कई हाइड्रो प्रोजेक्ट संचालित हैं, लेकिन नए प्रोजेक्ट्स को कानूनी अड़चनों के साथ स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा है. ऐसे में सरकार छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के जरिए पर्यावरणीय प्रभाव को कम रखते हुए ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
165 मेगावाट बिजली
सरकार की योजना के तहत राज्य के अलग-अलग चिन्हित क्षेत्रों में 14 छोटी परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी. इससे प्रदेश को बिजली के साथ राजस्व मिलने की भी उम्मीद है.
सरकार इन परियोजनाओं को निजी बिजली कंपनियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि निर्माण पर आने वाले खर्च का पूरा बोझ सरकार पर न पड़े. ऊर्जा विभाग ने इस दिशा में होमवर्क शुरू कर दिया है.
आठ हजार रोजगार
माना जा रहा है कि सभी 14 परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो करीब 165 मेगावाट बिजली मिलने के साथ लगभग 8 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है. परियोजनाओं के निर्माण से अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है.
तैयार किए गए रोडमैप के अनुसार, इन परियोजनाओं को गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में लगाया जाना है. इसमें रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी के अलावा पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले शामिल हैं.
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, छोटी हाइड्रो परियोजनाओं के जरिए कम समय में निर्माण पूरा कर विद्युत उत्पादन शुरू किया जा सकेगा. इससे बिजली की मांग पूरी करने के साथ लोगों के लिए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे.


