उत्तराखण्ड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) को लेकर विभिन्न स्तरों पर उठाए जा रहे सवालों और प्रचारित की जा रही भ्रामक जानकारियों पर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने कहा है कि राज्य में एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को गति देने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं. इस पूरी प्रक्रिया को लेकर तथ्यों से परे कई ऐसी जमीनों और परिसंपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है, जिनका वर्तमान प्रस्तावों से कोई संबंध नहीं है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनिंदा सरकारी भूमि का उपयोग प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किया जा रहा है, न कि किसी भी प्रकार से सरकारी संपत्तियों को मनमाने ढंग से हस्तांतरित करने के लिए.
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने UIIDB से संबंधित विषयों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर पूर्व में भी तथ्यों के साथ जानकारी दी जा चुकी है. इसके बावजूद बार-बार इस विषय को उठाकर कई तरह की भ्रामक धारणाएं बनाई जा रही हैं. इसलिए आवश्यक है कि प्रदेश की जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से रखी जाए.
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उन्होंने कहा कि किसी भी आर्थिक गतिविधि को धरातल पर उतारने के लिए भूमि एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन होती है. उद्योग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य निवेश परियोजनाओं के विकास के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता आवश्यक है. इसी दृष्टिकोण से राज्य की अर्थव्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को दोगुना करने की संभावनाओं पर पूर्व में एक विस्तृत एक्सरसाइज कराई गई थी. इस प्रक्रिया में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि राज्य की उपलब्ध सरकारी भूमि का योजनाबद्ध और उत्पादक उपयोग किया जाए, ताकि नई आर्थिक गतिविधियां विकसित हों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों और सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो.
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि इस उद्देश्य से कुछ चुनिंदा लैंड पार्सल चिह्नित किए गए हैं. वर्तमान में इनकी संख्या बहुत सीमित है. इसके विपरीत जिस प्रकार से बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने का प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है. उन्होंने बताया कि आगामी दो से तीन माह के भीतर लगभग 6-7 चयनित लैंड पार्सल की बिडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. यह प्रक्रिया राज्य में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संभावनाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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प्रमुख सचिव ने कहा कि विशेष रूप से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं हैं. उत्तराखण्ड पर्यटन की दृष्टि से देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है. यहां धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और अन्य पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. ऐसे में यदि इस क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निवेश आकर्षित किया जाता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश के युवाओं, स्थानीय कारोबारियों, छोटे उद्यमियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगा.
प्रमुख सचिव के अनुसार, प्रस्तावित हॉस्पिटैलिटी निवेश से लगभग 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है, जबकि इससे जुड़ी सहायक आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से लगभग 10,000 से 15,000 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं. इसके अतिरिक्त इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप जीएसटी एवं अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति की संभावना भी व्यक्त की गई है. इस प्रकार यह पहल केवल भूमि के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, निवेश, स्थानीय व्यापार और राज्य की राजस्व क्षमता को बढ़ाने की एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है.
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प्रमुख सचिव ने विभिन्न स्थानों की भूमि को लेकर किए जा रहे प्रचार पर भी विस्तार से स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि कई ऐसी जमीनों का उल्लेख किया जा रहा है, जिन्हें वर्तमान योजना का हिस्सा बताकर भ्रम पैदा किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है.

