अवस्थापना विकास सलाहकार सेतु आयोग दिनेश अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के वास्तविक एवं सतत विकास के लिए राज्य के हर पर्वतीय गांव तक सुदृढ़ स्वास्थ्य एवं शिक्षा अवसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है. जब गांवों में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं मजबूत होंगी, तभी पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी, आजीविका के अवसर टिकाऊ बनेंगे और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के संकल्प को वास्तविक अर्थों में साकार किया जा सकेगा.
आज सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में अवस्थापना विकास सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने कहा कि आयोग का प्रयास है कि नीतिगत सुधारों के प्रस्ताव तैयार करते समय जमीनी तथ्यों और वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए. इस क्रम में आयोग द्वारा पांच क्षेत्रों यथा अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी एवं उप शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन और डेटा एनालिटिक्स पर कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आयोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को साक्ष्य-आधारित एवं परिणाम-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
इसे भी पढ़ें : ‘9 नवंबर तक धरातल पर दिखना चाहिए काम’, रोपवे परियोजनाओं पर CM धामी सख्त, धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
श्री अग्रवाल ने कहा कि अर्थव्यवस्था एवं कौशल विकास के तहत उत्तराखण्ड बायोएनर्जी नीति-2026, वन पंचायत नियमावली-2026 तथा सहकारिता नीति-2026 के प्रारूपण पर कार्य किया जा रहा है. एनआईआईटी फाउंडेशन के सहयोग से विभिन्न संस्थानों में फ्यूचर स्किल्स एवं डिजिटल कौशल विकास, नैसकॉम के सहयोग से 119 राज्य महाविद्यालयों में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स, प्रमुख संगठित खरीदारों के माध्यम से किसानों की बाजार पहुंच का सुदृढ़ीकरण और ओवरसीज प्लेसमेंट सेल की रूपरेखा तैयार करने पर भी कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अवसंरचना एवं कल्याण के क्षेत्र में आयोग द्वारा पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ग्रामीण विकास निधि (आरजीएनवी), देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटलिटी कौशल केंद्र में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की व्यवस्था, एनीमिया, स्टंटिंग एवं मातृ-शिशु मृत्यु दर पर लक्षित हस्तक्षेप तथा एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर एवं टेलीमेडिसिन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तीव्र शहरीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते जनसंख्या दबाव को देखते हुए नगरीय स्थानीय निकायों को अधिकारों के हस्तांतरण पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने और प्रदेश के लिए नवीन शहरी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि नगरों में नियोजित विकास और बेहतर नागरिक सेवाएं सुनिश्चित हो सकें.
इसे भी पढ़ें : ‘बार-बार सड़क खोदने की जरूरत न पड़े’, PNG पाइपलाइन पर CS का प्लान, कुंभ से पहले पूरा होगा काम
सलाहकार ने कहा कि पूर्व में मंद गति से चल रहे राज्य के व्यवस्थित मूल्यांकन कार्य को अब आयोग द्वारा सुदृढ़ किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का मूल्यांकन राज्य के विश्वविद्यालयों की भागीदारी से प्रारंभ किया गया है. इसके साथ ही ‘विकसित उत्तराखण्ड-2047’ के लिए व्यापक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसे राज्य सरकार द्वारा अंगीकृत किए जाने की प्रक्रिया चल रही है.
इसके साथ ही डिजिटल एवं डेटा आधारित सुशासन पर जोर दिया जा रहा है. इसके तहत प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य डेटा शासन नीति का निर्माण किया जा रहा है, जिसका मार्गदर्शक सिद्धांत ‘एक पहचान, अनेक समाधान’ है. यह नीति नागरिकों एवं फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से मुक्ति दिलायगी. डिजिटल कनेक्टिविटी में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के प्रति अधिक सुदृढ़ एवं अनुकूल डिजिटल ढांचा उपलब्ध करायेगी, ताकि किसी भी नागरिक, कार्यकर्ता अथवा विकास कार्यक्रम को तकनीकी बाधाओं का प्रभाव न झेलना पड़े.


