सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार में आधुनिक और हाई-स्पीड ट्रेनों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पटना से गोरखपुर के बीच चलने वाली अत्याधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को असामाजिक तत्वों ने एक बार फिर अपना निशाना बनाया है। पूर्वी चम्पारण जिले के सुगौली स्टेशन के आसपास कुछ उपद्रवी तत्वों ने इस प्रीमियम ट्रेन पर पथराव कर दिया, जिससे ट्रेन की खिड़की का शीशा टूट गया। गनीमत यह रही कि जिस सीट पर पत्थर लगा, उस वक्त वहां कोई यात्री नहीं बैठा था, अन्यथा एक बड़ी और दर्दनाक दुर्घटना घट सकती थी।

​घटना का विवरण: सुगौली के पास हुआ हमला

​मिली जानकारी के अनुसार, पटना से खुलकर गोरखपुर की ओर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस जब पूर्वी चम्पारण जिले के सुगौली स्टेशन के आस-पास के इलाके से गुजर रही थी, तभी अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने ट्रेन पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव की रफ्तार इतनी तेज थी कि ट्रेन के कोच का शीशा चकनाचूर हो गया। आवाज सुनकर ट्रेन के अंदर बैठे यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और सहम का माहौल बन गया। हालांकि, ट्रेन के चालक ने गति धीमी किए बिना ट्रेन को सुरक्षित आगे निकाला।
​घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। आरपीएफ की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों में संदिग्धों की पहचान करने के लिए खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।

​लगातार हो रही घटनाओं से बढ़ रही चिंता

​यह पहली बार नहीं है जब बिहार या पूर्वी चम्पारण क्षेत्र में वंदे भारत एक्सप्रेस को उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी द्वारा कई मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है और कुछ उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की आपराधिक और नासमझ हरकतों पर पूरी तरह विराम नहीं लग पा रहा है।
​वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन देश की आधुनिक और गौरवशाली परिवहन व्यवस्था का प्रतीक है। ऐसे में बार-बार पटरियों के पास से ट्रेन पर पत्थर फेंके जाने की घटनाएं रेलवे संपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान तो पहुंचा ही रही हैं, साथ ही रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।

​सुरक्षा को लेकर कड़े कदम

​प्रशासन के लिए यह घटना एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। जानकारों का मानना है कि केवल आरोपियों पर कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए रेलवे ट्रैक के किनारे बसे गांवों और बस्तियों में जन-जागरूकता अभियान चलाने की भी सख्त जरूरत है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और आरपीएफ की खुफिया नजर बनाए रखने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और यात्री सुरक्षित सफर का आनंद ले सकें।