Business Desk – अगर आपने भारत में रहते हुए Public Provident Fund यानी PPF Account में निवेश किया है और अब नौकरी, पढ़ाई या किसी अन्य कारण से विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि विदेश जाने के बाद आपके PPF खाते का क्या होगा।

क्या आप इसमें आगे भी पैसा जमा कर पाएंगे, क्या ब्याज मिलता रहेगा और मैच्योरिटी पर पैसा कहां मिलेगा? इन सवालों के जवाब इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप केवल NRI बने हैं या बाद में किसी दूसरे देश की Citizenship भी ले लेते हैं।

NRI बनने पर मौजूदा PPF अकाउंट का क्या होगा?

अगर आपने भारत में रहते हुए PPF Account खोला था और बाद में नौकरी या पढ़ाई के लिए विदेश चले गए, तो केवल NRI बनने से आपका मौजूदा PPF अकाउंट तुरंत बंद नहीं होता। ऐसे खाताधारक अपने पुराने PPF खाते को उसकी मूल 15 साल की अवधि पूरी होने तक जारी रख सकते हैं।

विदेश जाने के बाद खाते को तय नियमों के अनुसार मैनेज किया जा सकता है। हालांकि, NRI बनने के बाद PPF की मूल 15 साल की अवधि पूरी होने पर खाते को आगे बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध नहीं होता। यानी भारत में रहने वाले खाताधारकों की तरह NRI व्यक्ति PPF की मैच्योरिटी के बाद खाते को नई अवधि के लिए जारी नहीं रख सकता।

PPF अकाउंट में हर साल कितना पैसा जमा करना जरूरी है?

PPF Account को सक्रिय रखने के लिए प्रत्येक वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी होता है। यह न्यूनतम योगदान खाते की मूल 15 साल की अवधि के दौरान लागू रहता है।

अगर किसी वित्त वर्ष में न्यूनतम राशि जमा नहीं की जाती है तो PPF Account निष्क्रिय हो सकता है। ऐसे खाते को दोबारा सक्रिय कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और लागू शुल्क या पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए विदेश में रहने वाले PPF खाताधारक को भी खाते में जरूरी न्यूनतम योगदान और लागू नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या NRI विदेश जाने के बाद PPF में निवेश जारी रख सकता है?

भारत में रहते हुए खोले गए मौजूदा PPF खाते को NRI उसकी मूल 15 साल की अवधि तक जारी रख सकता है। हालांकि, विदेश जाने के बाद PPF में नए निवेश को लेकर लागू नियमों और बैंक या पोस्ट ऑफिस की प्रक्रिया को ध्यान से समझना जरूरी है।

इसलिए विदेश जाने से पहले अपने PPF Account की स्थिति, योगदान और KYC से जुड़ी जानकारी संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस से अपडेट कराना बेहतर है। इससे बाद में खाते को मैनेज करने में परेशानी कम हो सकती है।

विदेशी नागरिकता लेने पर PPF अकाउंट का क्या होगा?

NRI बनने और विदेशी नागरिकता हासिल करने में अंतर है। अगर कोई व्यक्ति बाद में किसी दूसरे देश की Citizenship ले लेता है तो उसके PPF खाते पर अलग नियम लागू होते हैं।

दिए गए नियमों के अनुसार, जिस महीने व्यक्ति विदेशी नागरिक बनता है, उससे ठीक पिछले महीने के आखिरी दिन से PPF Account को बंद माना जाता है। इसके बाद खाते पर सामान्य PPF Interest Rate के अनुसार ब्याज नहीं मिलता। खाते को औपचारिक रूप से बंद किए जाने तक जमा रकम पर लागू Post Office Savings Account की ब्याज दर के अनुसार ब्याज दिए जाने का प्रावधान है।

PPF की मैच्योरिटी पर पैसा कहां मिलेगा?

PPF की मूल 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद खाते में जमा राशि का भुगतान किया जाता है। यदि खाताधारक उस समय NRI है तो उपलब्ध नियमों के अनुसार मैच्योरिटी की रकम उसके NRO Account में जमा की जा सकती है।

NRO यानी Non-Resident Ordinary Account विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत में मौजूद आय और निवेश से जुड़ी रकम को मैनेज करने में उपयोगी होता है। इसलिए विदेश जाने वाले व्यक्ति के लिए बैंक खाते की स्थिति और PPF से जुड़ी बैंकिंग जानकारी सही रखना जरूरी है।

क्या NRO अकाउंट से पैसा विदेश भेज सकते हैं?

भारत में NRO Account में मौजूद रकम को विदेश भेजने के लिए RBI के नियम लागू होते हैं। निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर एक वित्त वर्ष में अधिकतम 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक की रकम विदेश भेजने की अनुमति हो सकती है। इसके लिए लागू टैक्स, दस्तावेज और अन्य नियमों का पालन करना पड़ता है।

NRI और विदेशी नागरिक के नियम में अंतर समझें

सबसे जरूरी बात यह है कि NRI बनना और विदेशी नागरिक बनना एक ही बात नहीं है। अगर कोई भारतीय नागरिक नौकरी या पढ़ाई के लिए विदेश चला जाता है और NRI बनता है तो भारत में पहले से मौजूद PPF Account को उसकी मूल 15 साल की अवधि तक जारी रखने के नियम हैं। दूसरी ओर, विदेशी नागरिकता हासिल करने पर PPF खाते पर अलग नियम लागू होते हैं और खाते की स्थिति बदल जाती है।

इसलिए विदेश जाने से पहले अपने PPF Account, KYC, बैंक अकाउंट और नागरिकता/रेजिडेंसी स्टेटस से जुड़े नियमों की जानकारी संबंधित बैंक, पोस्ट ऑफिस या वित्तीय सलाहकार से जरूर लें। PPF, NRI और टैक्स से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए किसी वित्तीय निर्णय से पहले मौजूदा आधिकारिक नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।