Automobile Desk – इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन आज भी एक बड़ा वर्ग इन्हें खरीदने से झिझकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘रेंज एंग्जायटी’ यानी सफर के बीच में बैटरी खत्म हो जाने और चार्जिंग स्टेशन न मिलने का डर। इस समस्या का समाधान बनकर उभरी है एक नई टेक्नोलॉजी—REEV (Range-Extender Electric Vehicle)। यह तकनीक पेट्रोल और बिजली के अनोखे कॉम्बिनेशन से चलती है, जो बिना किसी रुकावट के लंबी दूरी तय करने की सुविधा देती है।

पारंपरिक हाइब्रिड और REEV में मुख्य अंतर
अक्सर लोग REEV को माइल्ड हाइब्रिड या प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि दोनों की कार्यप्रणाली में जमीन-आसमान का अंतर है:
- सामान्य हाइब्रिड कारें: इनमें इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर, दोनों मिलकर सीधे गाड़ी के पहियों को घुमाने का काम करते।
- REEV तकनीक: इसमें गाड़ी को चलाने का पूरा काम केवल इलेक्ट्रिक मोटर ही करती है। इसमें मौजूद छोटा पेट्रोल इंजन कभी भी पहियों को डायरेक्ट पावर नहीं देता। इंजन का एकमात्र काम एक जनरेटर की तरह बिजली पैदा करना होता है, जिससे बैटरी चार्ज होती रहती है और मोटर को लगातार पावर मिलती है।
- सरल शब्दों में कहें तो REEV का ड्राइविंग अनुभव 100% इलेक्ट्रिक कार जैसा ही होता है, लेकिन इसमें रास्ते में रुकने का जोखिम खत्म हो जाता है।
छोटी बैटरी और कम लागत का फायदा
फुल-इलेक्ट्रिक कारों में लंबी रेंज देने के लिए 50 से 80 kWh क्षमता वाली बड़ी और भारी बैटरियां लगानी पड़ती हैं, जिससे कार की कीमत काफी बढ़ जाती है।
REEV गाड़ियों में 15 से 30 kWh की छोटी बैटरी ही पर्याप्त होती है, क्योंकि बैकअप के लिए पेट्रोल जनरेटर मौजूद रहता है। बैटरी का आकार छोटा होने के कारण वाहन का कुल वजन कम रहता है और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में भी भारी कमी आती है। इससे कार की बाजार कीमत आम खरीदारों की पहुंच में आ सकती है।
भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल विकल्प
भारत में भले ही प्रमुख शहरों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार हो रहा हो, लेकिन हाईवे और दूर-दराज के इलाकों में फास्ट चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता अभी भी एक चुनौती है। इसके अलावा, भारत में ज्यादातर परिवार एक ही कार रखते हैं, जिससे वे दैनिक शहर की आवाजाही और छुट्टियों में लंबी यात्राएं दोनों पूरी करते हैं।
रोजमर्रा की ड्राइविंग: रोजाना शहर में ऑफिस आने-जाने के लिए इसे घर पर चार्ज करके पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड (शून्य पेट्रोल खर्च) पर चलाया जा सकता है।
लंबी यात्राएं: हाईवे पर बैटरी डिस्चार्ज होने की स्थिति में सिर्फ सामान्य पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाना होता है और सफर बिना किसी लंबी चार्जिंग रुकावट के जारी रहता है।
वैश्विक ऑटो क्षेत्र में बढ़ती मांग
REEV तकनीक को अब केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि ऑटो इंडस्ट्री का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
- सान (Nissan): अपनी ‘e-Power’ टेक्नोलॉजी के साथ इस क्षेत्र में पहले ही काफी लोकप्रियता हासिल कर चुका है।
- हुंडई (Hyundai) व स्टेलेंटिस (Stellantis): अपने नए REEV प्लेटफॉर्म विकसित करने पर तेजी से निवेश कर रहे हैं।
- चीन का बाजार: ‘ली ऑटो’ (Li Auto) जैसी चीनी ऑटो मेकर्स ने REEV सेगमेंट में गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है।


