Dharm Desk – ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह बताया गया है। राहु की नाराजगी से जीवन में अचानक रुकावटें, भय, भ्रम और अस्थिरता बढ़ने लगती है। कई बार व्यक्ति समझ ही नहीं पाता कि लगातार बनते काम क्यों बिगड़ रहे हैं। मानसिक तनाव क्यों बढ़ रहा है या घर में बिना कारण क्लेश क्यों बना हुआ है। ऐसे संकेत जब सामान्य सीमा से आगे बढ़ जाएं, तो इसे राहु के प्रबल अशुभ प्रभाव का संकेत मान लेना चाहिए।

मान्यता है कि ऐसे समय में बुधवार या शनिवार के दिन उनकी माता सिंहिका का स्मरण करने से राहत मिलने लगती है, क्योंकि मां की आज्ञा को राहु भी नहीं टाल सकते।
कौन हैं माता सिंहिका? जानिए पूरी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सिंहिका एक मायावी राक्षसी थी, जो रामायण में लंका जाते समय हनुमानजी के मार्ग में आई थी। वह ऋषि कश्यप और दिति की पुत्री तथा स्वरभानु (राहु) की माता थीं। सिंहिका असुर कुल की एक प्रभावशाली और शक्तिशाली स्त्री थीं l उनका पुत्र स्वर्भानु अत्यंत चतुर और मायावी था। समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत बांटा जा रहा था, तब स्वर्भानु ने छल से देवता का रूप धारण कर अमृत पी लिया। तभी भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया । अमृत के प्रभाव से उसका सिर राहु और धड़ केतु बन गया। इसके बाद भी सिंहिका का अपने पुत्र पर विशेष प्रभाव बना रहा, इसलिए जब राहु उग्र हो जाते है तो उनकी माता का स्मरण उन्हें शांत करने का उपाय माना जाता है।
राहु के परेशान करने वाले संकेत
जब राहु अशुभ प्रभाव देने लगते हैं, तो जीवन में कई संकेत दिखाई देने लगते हैं…
- बिना कारण घबराहट, डर और मानसिक तनाव बढ़ना।
- बार-बार काम बनते-बनते बिगड़ जाना।
- घर-परिवार में झगड़े और अशांति बढ़ना।
- अचानक आर्थिक नुकसान या रुकावट।
- डरावने सपने या अनजाना भय महसूस होना।
- निर्णय लेने में भ्रम और अस्थिरता।
जब ये सभी संकेत एक साथ और लंबे समय तक बने रहें, तो समझना चाहिए कि राहु का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है।
बुधवार को ऐसे करें माता सिंहिका की प्रार्थना
ऐसी स्थिति में बुधवार या शिनवार का दिन विशेष माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत स्थान पर बैठकर माता सिंहिका का ध्यान करें। सच्चे मन से प्रार्थना करें…
हे माता सिंहिका, अपने पुत्र राहु के उग्र प्रभाव को शांत करें और मेरे जीवन से कष्ट दूर करें।
इसके साथ ओम सिंहिकायै नमः मंत्र का 108 बार जप करें। काले तिल, उड़द दाल या सरसों के तेल का दान करना भी शुभ होगा। नियमित रूप से यह उपाय करने पर धीरे-धीरे मानसिक शांति और जीवन में संतुलन आने लगता है।


