Lalluram Desk. भगवान शिव का स्वरूप जितना रहस्यमय है, उतना ही गहन आध्यात्मिक संशदे देने वाला भी है। उनके जटाजूट, गले में सर्प, तीसरा नेत्र और शरीर पर लगी भस्म… ये सभी प्रतीक साधारण नहीं हैं। विशेष रूप से भस्म (विभूति) धारण करने के पीछे एक ऐसी कथा और दर्शन छिपा है, जिसका उल्लेख शिवपुराण में मिलता है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के परम सत्य को समझाने वाला संकेत है ।
शिवपुराण के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपने पति भगवान शिव का अमापन सहन न कर पाने के कारण स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। तब यह समाचार सुनकर शिव शोक और क्रोध से व्याकुल हो उठे। वे सती के पार्थिव शरीर को लेकर आकाश और पृथ्वी पर विचरण करने लगे। उनके इस विकराल रूप से सृष्टि का संतुलन बिड़गने लगा। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शनचक्र से सती के शरीर को खंडित कर दिया। जिससे शिव का मोह टूट सके।
कुछ पौराणिक उल्लेखों में यह भी वर्णित है कि अंततः वह देह अग्नि में विलीन होकर भस्म में परिवर्तित हो गई। उस भस्म को शिव ने अपनी प्रिया की अंतिम स्मृति मान कर अपने शरीर पर धारण कर लिया। यह केवल शोक नहीं था, बल्कि प्रेम और वैराग्य का अद्भुत संगम था।
भस्म का आध्यात्मिक अर्थ
भगवान शिव की भस्म धारण करने का एक गहरा दार्शनिक संदेश भी है। भस्म इस बात का प्रतीक है कि यह शरीर नश्वर है और अंततः राख में ही बदल जाता है । जब शरीर जलकर भस्म बन जाता है, तब उसमें न कोई अहंकार बचता हैl न ही कोई भेदभाव—वह पूर्णतः शुद्ध और सम हो जाता है।
इसीलिए शिव भस्म को अपने शरीर पर लगाकर यह संदेश देते हैं कि मनुष्य को भी अहंकार, मोह और सांसारिक बंधनों से ऊपर उठना चाहिए। जीवन का अंतिम सत्य भस्म है और जो इस सत्य को स्वीकार कर लेता है, वही मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है ।
श्मशान और भस्म शिव का वैराग्य स्वरूप
महादेव का श्मशान में निवास और भस्म धारण करना, उनके वैराग्य का प्रतीक है। वे संसार की माया जाल से परे है। जहां सामान्य मनुष्य मृत्यु से भय भीत होता है, वहीं शिव उसे जीवन का स्वाभाविक सत्य मानते है। भस्म उनके इसी निर्भय और निरपेक्ष स्वरूप को दर्शाती है।
भस्म तिलक भक्त क्यों लगाते हैं
शिव भक्त भी अपने माथे पर भस्म का तिलक लगाते हैं, जिसे विभूति कहा जाता है, यह तिलक केवल धार्मिक आस्था का प्रकती नहीं, बल्कि यह स्मरण कराता है कि जीवन क्षणभंगुर है। यह व्यक्ति को विनम्रता, संयम और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करता है।
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