Dharm Desk – हिंदू धर्म में पूजा-पाठ यज्ञ हवन या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत शंखनाद से की जाती है। मंदिरों में आरती के समय गूंजने वाली शंख की आवाज न केवल माहौल को भक्तिमय बनाती है। बल्कि इसका गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी होता हैं। प्राचीन ग्रंथों में शंख को भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है। वहीं देवी-देवताओं की पूजा में इसका विशेष स्थान बताया गया है।

शंखनाद एक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का साधन माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और चारों ओर पवित्रता का संचार होता है। यही कारण है कि घर में पूजा के समय शंख बजाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि जहां नियमित रूप से शंखनाद होता है। वहां लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर रहती है।

पुराण और ग्रंथों में समुद्र मंथन के दौरान शंख की उत्पत्ति हुई थी और इसे भगवान विष्णु ने अपने हाथों में धारण कर लिया था। यही कारण है कि इसे अत्यंत पवित्र और दिव्य माना जाता है। महा भारतकाल में भी युद्ध के आरंभ से पहले शंखनाद का जिक्र मिलता है। जहां श्रीकृष्ण और अर्जुन ने अपने-अपने शंख बजाकर युद्ध की घोषणा की थी। इससे यह क्लियर होता है कि शंखनाद साहस ऊर्जा और विजय का प्रतीक भी है।

शंखनाद के फायदे

  1. धार्मिक दृष्टि से शंख की आवाज को ‘ओम्’ के समान प्रभावी बताया गया है। जब शंख बजाया जाता है तो उससे निकलने वाली ध्वनि पूरे माहौल में सकारात्मक कंपन पैदा करती है। यह ध्वनि मन को शांति प्रदान करती है और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होती है। यही कारण है कि मंदिरों और पूजा स्थलों पर शंख का विशेष महत्व है।
  2. घर में शंख रखने और उसे प्रतिदिन बजाने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं। ऐसा बोला जाता है कि इससे ग्रहों के बुरे प्रभाव कम होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। स्पेशल रूप से सुबह और शाम के समय शंखनाद करना बहुत शुभ फल दायी माना गया है।
  3. शंखनाद केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आस्था, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक है। इसकी आवाज न केवल वातावरण को शुद्ध करती है। इसके अलावा इंसान के अंदर भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।