पवन राय, मंडला। जय श्रीराम के जयकारे, रामायण के प्रसंग और मंच पर प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन महिला कलाकार… मध्य प्रदेश के मंडला जिले के सर्री गांव में रामलीला की 64 साल पुरानी परंपरा में इस बार एक नया अध्याय जुड़ गया है। यहां पहली बार पुरुषों के बजाय गांव की बेटियां और महिलाएं रामलीला के सभी प्रमुख पात्रों की भूमिका निभाई। महिला कलाकार, जय श्रीराम के जयकारे, रामायण के प्रसंग और मंच पर प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन नजर आई।

मंडला जिले के नैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सर्री में वर्ष 1964 से नवरात्रि के पावन अवसर पर रामलीला का मंचन होता आ रहा है। लेकिन इस बार करीब 25 महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से इस धार्मिक परंपरा को एक नई पहचान देने की पहल की है। खास बात यह है कि 18 से 50 वर्ष तक की इन महिला कलाकारों ने करीब 15 दिनों तक अभ्यास कर रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत करने की तैयारी की। कोई प्रभु श्रीराम बना तो किसी ने लक्ष्मण का किरदार निभाया, किसी ने माता सीता का रूप धारण किया तो किसी ने राजा दशरथ और राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

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15 अक्टूबर को गौरी पूजन और 18 अक्टूबर को राम विवाह व बारात का मंचन किया गया। सर्री की यह रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और नारी शक्ति का अद्भुत संगम है। आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक लोककलाओं को सहेजना चुनौती बन रहा है, वहीं इन महिलाओं ने महिलाओं ने साबित किया है कि संस्कृति की विरासत को आगे बढ़ाने में बेटियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अब देखना यह है कि महिलाओं की यह अनूठी पहल आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में कितनी प्रेरणादायक साबित होती है।

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