हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने 2027 तक यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए STP और CETP जैसे प्रोजेक्ट्स पर युद्धस्तर पर काम जारी है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। यमुना नदी की सफाई को लेकर वर्षों से दावे, योजनाएं और घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन धरातल पर तस्वीर बदलती नजर नहीं आई। कभी यमुना के पानी को जीवनदायिनी कहा जाता था, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि कई जगह इसका पानी न पीने लायक बचा है और न ही स्नान योग्य। ऐसे में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नया दावा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सवाल वही पुराना है- क्या इस बार सच में कुछ बदलेगा या फिर यह भी एक और सरकारी वादा साबित होगा?

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि “यमुना हमारी मां के समान है, 2027 तक हम यमुना को प्रदूषणमुक्त कर लेंगे।” मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और योजनाओं को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। उनका दावा है कि जल्द लोगों को यमुना में साफ और शुद्ध जल बहता नजर आएगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, यमुना में गिरने वाले गंदे पानी के नालों को रोकने के लिए बड़े स्तर पर STP (Sewage Treatment Plant – सीवेज शोधन संयंत्र) लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे 6 स्थानों पर काम जारी है, जिन्हें 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 6 अन्य परियोजनाएं टेंडर प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा पानीपत इंडस्ट्रियल जोन में CETP (Common Effluent Treatment Plant – सामूहिक अपशिष्ट शोधन संयंत्र) लगाए जा रहे हैं, ताकि उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ प्लांट लगाने से यमुना की दशा बदल जाएगी? क्योंकि बीते वर्षों में भी कई योजनाएं आईं, बजट खर्च हुआ, लेकिन प्रदूषण का स्तर कम होने की बजाय बढ़ता ही गया। जानकार मानते हैं कि जब तक अवैध डिस्चार्ज, सीवर प्रबंधन और औद्योगिक कचरे पर सख्ती नहीं होगी, तब तक यमुना को साफ करना आसान नहीं होगा।

अब निगाहें 2027 पर हैं। मुख्यमंत्री का यह दावा प्रदेशवासियों के लिए उम्मीद जगा रहा है, लेकिन जनता जवाब भी चाहती है-क्या इस बार यमुना सच में साफ होगी या फिर यह भी फाइलों और बयानों तक सीमित रह जाएगा?