लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव (Ayodhya Deepotsav 2026) को सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक बताते हुए जातीय राजनीति पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटती है, जबकि साझी आस्था और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में पिरोती है. योगी ने 2017 से पहले की सरकारों पर जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने और सांस्कृतिक विरासत की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया.
सीएम योगी ने एक्स पर लिखा कि जाति की जड़ता समाज को बांटती है, जबकि साझी आस्था और संस्कृति उसे एक सूत्र में पिरोती हैं. श्री अयोध्या जी का दीपोत्सव इसी सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है. वर्ष 2017 से पहले जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने वाली सरकारों ने समाज को जोड़ने वाली इस सांस्कृतिक शक्ति की पूर्णतः उपेक्षा की.
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डबल इंजन सरकार ने वर्ष 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत कर इस सोच को बदला और राम नगरी की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन के उत्सव में बदल दिया. पूज्य संत गण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में आज धर्माचार्य गण, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी सभी समान उत्साह एवं श्रद्धा से इस आयोजन में सहभागी होते हैं. यहां पहचान जाति से नहीं, सहभागिता से होती है. दीप अलग-अलग हाथों में जलते हैं, लेकिन उनका प्रकाश पूरे समाज को एक करता है. यही दीपोत्सव का संदेश है. यही समरस समाज की संकल्पना है.

