दिल्ली में पुरानी बाइक को कथित तौर पर जब्त किए जाने के बाद स्क्रैप (scrap) किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने वाहन मालिक की याचिका खारिज कर दी है। वाहन मालिक ने बाइक स्क्रैप किए जाने के एवज में नगर प्रशासन से एक करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे की मांग की थी। वाहन मालिक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सिंगल जज के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी मांग को राहत नहीं दी गई थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने की।
दरअसल, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने दिसंबर 2024 में 18 साल पुरानी बाइक को जब्त किया था। अथॉरिटी के मुताबिक, बाइक एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल (ELV) की कैटेगरी में आती थी और इसी आधार पर उसे स्क्रैप करा दिया गया। बाइक मालिक ने कोर्ट में दलील दी कि उसकी बाइक उसके घर के बाहर खड़ी थी और उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। अपीलकर्ता के मुताबिक, बाइक पिछले चार साल से चलन में नहीं थी और घर के बाहर खड़ी होने के कारण उससे किसी तरह का प्रदूषण भी नहीं फैल रहा था। वाहन मालिक ने इसी आधार पर बाइक को जब्त कर स्क्रैप किए जाने को चुनौती दी और हुए नुकसान के बदले नगर प्रशासन से एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजे की मांग की।
याचिकाकर्ता का दावा- नोटिस तक नहीं दिया
बाइक मालिक ने कोर्ट में दावा किया कि उसे बाइक जब्त करने या स्क्रैप करने से पहले कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। उसका कहना था कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए उसकी बाइक को स्क्रैप करना संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन है। अनुच्छेद 300A के तहत किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार के अलावा उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने इसी संवैधानिक प्रावधान का हवाला देते हुए बाइक की जब्ती और स्क्रैप किए जाने पर सवाल उठाया।
बाइक से था भावनात्मक लगाव
याचिकाकर्ता ने बाइक के नुकसान के लिए 1.43 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। उसने कहा कि बाइक को कथित तौर पर गलत तरीके से जब्त और स्क्रैप किए जाने की वजह से उसे लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलना पड़ा। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उसका बाइक से भावनात्मक लगाव था और इसी वजह से उसके नुकसान को केवल वाहन की आर्थिक कीमत के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बाइक से था भावनात्मक लगाव
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने अपनी बेहद कीमती, अच्छी तरह से रखी गई और एंटीक निजी संपत्ति खो दी है। उसने बाइक से भावनात्मक लगाव होने की बात भी कही। बाइक को कथित तौर पर गलत तरीके से जब्त और स्क्रैप किए जाने के कारण लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलने का दावा करते हुए उसने 1.43 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की। शख्स ने यह भी दावा किया कि बाइक उसके घर के बाहर खड़ी थी और पिछले चार साल से इस्तेमाल में नहीं थी। इसलिए उससे किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैल रहा था।
नोटिस दिए बिना बाइक स्क्रैप करने का दावा
अपीलकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे बाइक जब्त करने या स्क्रैप करने से पहले कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। उसका कहना था कि इस तरह उसकी संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन है। इस अनुच्छेद के मुताबिक किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार के अलावा उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने बाइक को स्क्रैप किए जाने के कारण हुए नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा और कथित मानहानि के लिए भी मुआवजे की मांग की।
प्रशासन ने क्या जवाब दिया?
दूसरी ओर, अधिकारियों ने कोर्ट में कहा कि बाइक को ‘व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) के रजिस्ट्रेशन और कामकाज से जुड़े नियम, 2021’ के तहत स्क्रैप किया गया है। प्रशासन के मुताबिक, वाहन मालिक निर्धारित समय के भीतर जरूरी अंडरटेकिंग यानी हलफनामा पेश नहीं कर सका। अधिकारियों का कहना था कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए बाइक को ELV श्रेणी में रखा गया और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की गई।
सिंगल बेंच के फैसले में दखल से इनकार
वाहन मालिक ने सिंगल जज के फैसले को चुनौती देते हुए डिविजन बेंच का रुख किया था। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने की। डिविजन बेंच ने 24 अगस्त को दिए अपने फैसले में सिंगल जज के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। सिंगल जज ने याचिकाकर्ता को राहत के लिए सिविल कोर्ट का रुख करने को कहा था।
कोर्ट ने ELV जब्ती और स्क्रैपिंग पर क्या कहा?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल (ELV) को जब्त कर स्क्रैप करना RVSF नियमों और संबंधित दिशा-निर्देशों के तहत किया जाता है। नियमों के मुताबिक, अगर कोई ELV सार्वजनिक जगह पर चलता हुआ या खड़ा हुआ पाया जाता है तो उसे जब्त कर रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर को सौंपा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों में ऐसे वाहन को छुड़ाने का प्रावधान है। जब्ती के तीन सप्ताह के भीतर आवेदन करने पर वाहन को रिलीज कराया जा सकता है।
बाइक छुड़ाने के लिए आवेदन का सबूत नहीं
याचिकाकर्ता के मामले पर गौर करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है जिससे यह साबित हो कि अपीलकर्ता ने अपनी बाइक को छुड़ाने के लिए निर्धारित समय के भीतर आवेदन किया था। कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की मांग पर विचार करने से पहले यह जांचना जरूरी होगा कि अधिकारियों ने ELV को जब्त करने, उसे रिलीज करने और फिर स्क्रैप करने की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के मुताबिक अपनाई थी या नहीं।
रिट याचिका में नहीं हो सकती गहराई से जांच
कोर्ट ने कहा कि यह भी जांचना होगा कि बाइक को कानूनी तरीके से जब्त किया गया था या नहीं और क्या अपीलकर्ता की ओर से जरूरी अंडरटेकिंग नहीं देने के कारण ही उसे स्क्रैप करने के लिए भेजा गया। बेंच ने माना कि इन सभी तथ्यों और दावों की गहराई से जांच रिट याचिका की कार्यवाही में नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में साक्ष्यों की विस्तृत जांच जरूरी होगी। इसी आधार पर चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिविजन बेंच ने 24 अगस्त को अपील खारिज कर दी और सिंगल जज के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को राहत के लिए सिविल कोर्ट जाने को कहा गया था।
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