पटना। बैंक से लाखों रुपये का कर्ज लेने के बाद जानबूझकर भुगतान नहीं करने वाले लोगों पर अब जिला प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में है। प्रशासन ने जिले के सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 25 लाख रुपये या उससे अधिक का कर्ज जानबूझकर नहीं चुकाने वाले कर्जदारों की सूची जल्द उपलब्ध कराएं। सूची मिलने के बाद संबंधित डिफाल्टरों के खिलाफ नियमानुसार नीलाम पत्र वाद दायर कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लिए गए कर्ज में डिफाल्टर हुए लाभुकों की सूची भी बैंकों से मांगी गई है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई कर बैंक ऋण की रिकवरी सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने बैंकों को लंबित ऋण वसूली के मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं।

यह निर्णय डीएम कुंदन कुमार के निर्देश पर लिया गया। शुक्रवार को उप विकास आयुक्त शुभम कुमार की अध्यक्षता में जिला परामर्शदात्री समिति और जिलास्तरीय समीक्षा समिति की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में जिले के बैंकिंग कामकाज, ऋण वितरण और वसूली की स्थिति की समीक्षा की गई। इसमें जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अभिषेक के अलावा जिले के 34 बैंकों के जिला समन्वयक भी मौजूद रहे।

सीडी रेशियो कम होने पर जताई गई चिंता

बैठक के दौरान जिले के सीडी रेशियो यानी नकद-जमा अनुपात की स्थिति पर भी चर्चा हुई। जिले का सीडी रेशियो फिलहाल 50.04 प्रतिशत है, जबकि राज्य का औसत करीब 58 प्रतिशत है। इस पर अधिकारियों ने चिंता जताते हुए बैंकों को ऋण वितरण बढ़ाने पर जोर दिया।

उप विकास आयुक्त ने बैंकों को निर्देश दिया कि जमा राशि का अधिक से अधिक हिस्सा ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाए और सीडी रेशियो को आदर्श स्तर 70 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इससे जिले में कारोबार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।