दिल्ली के यमुना बाजार (Yamuna Bazar) क्षेत्र में यमुना किनारे स्थित 32 घाटों के कायाकल्प की योजना जल्द शुरू होने जा रही है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) ने यमुना पुनर्जीवन से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लोक निवास के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (Yamuna Sports Complex) में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों के साथ उपराज्यपाल की बैठक हुई। बैठक में यमुना सफाई और पुनर्जीवन से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उपराज्यपाल ने कहा कि यमुना बाढ़ क्षेत्र (Floodplain) से जुड़ी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए काम की रफ्तार बढ़ाई जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
बाढ़ क्षेत्र में 35 जलभूमियों का विकास
यमुना पुनर्जीवन परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नदी के बाढ़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके तहत यमुना किनारे देशी प्रजातियों के पौधे और नदी तटीय घास लगाई गई है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिल सके। बैठक में जानकारी दी गई कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में 35 नम भूमियों (वेटलैंड्स) और जलाशयों का विकास किया गया है। इन क्षेत्रों को जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। उपराज्यपाल ने यमुना किनारे विकसित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। इनमें असिता, बांसेरा, अमृत जैव विविधता पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
6 महीने में जमीन पर उतर सकती है योजना
दिल्ली में यमुना पुनर्जीवन अभियान को गति देने के लिए उपराज्यपाल ने संबंधित एजेंसियों को विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। यमुना कायाकल्प परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, अगले छह महीनों के भीतर यमुना बाजार क्षेत्र के 32 ऐतिहासिक घाटों के पुनर्विकास का काम शुरू होने की संभावना है। इसके लिए Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (INTACH) की ओर से विस्तृत अध्ययन भी कराया गया है, ताकि घाटों का विकास ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए किया जा सके। यमुना के बाढ़ क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए पिछले कुछ महीनों में बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया है। DDA के अनुसार, करीब 1700 हेक्टेयर क्षेत्र में नदी तट सुधार कार्य किए गए हैं। इस अभियान के दौरान करीब 88,574 मीट्रिक टन मलबा हटाया गया लगभग 4,998 मीट्रिक टन कचरे का निपटारा किया करीब 1,425 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया
अधिकारियों के अनुसार, यमुना किनारे अब तक सात लाख से अधिक देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा नदी क्षेत्र में स्थानीय घास और वेटलैंड प्रजातियों का भी रोपण किया गया है, ताकि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके और यमुना के आसपास जैव विविधता को बढ़ावा मिले। अधिकारियों ने बताया कि यमुना कॉरिडोर में अब तक 35 वेटलैंड विकसित किए जा चुके हैं। इन वेटलैंड से भूजल रिचार्ज बढ़ाने, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण क्षमता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना किनारे स्थित ऐतिहासिक घाट केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि दिल्ली की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा हैं। इन घाटों का संबंध शहर के इतिहास, परंपराओं और सामाजिक जीवन से रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में रखरखाव की कमी और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण कई घाटों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। अब पुनर्विकास योजना के तहत इन ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के साथ विकसित करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत घाटों के सौंदर्यीकरण, साफ-सफाई, सुविधाओं के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लोगों का यमुना नदी से जुड़ाव और मजबूत होगा, साथ ही दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को भी नया आयाम मिलेगा।
पहले से बदल रही है यमुना किनारे की तस्वीर
दिल्ली में यमुना पुनर्जीवन अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में नदी तट पर कई महत्वपूर्ण हरित परियोजनाएं विकसित की गई हैं। असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसी परियोजनाओं ने यमुना क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इन परियोजनाओं के जरिए नदी किनारे हरियाली बढ़ाने, स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। अब प्रशासन का फोकस यमुना के ऐतिहासिक घाटों के पुनर्जीवन और उनके विकास पर है। इसी कड़ी में यमुना को कचरा मुक्त बनाने के लिए शुरू किए गए विशेष जनभागीदारी अभियान को भी अच्छा समर्थन मिला है। दिल्ली सरकार के अनुसार, अभियान के पहले ही दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। यह सफाई अभियान एक साथ 28 घाटों पर चलाया गया, जिसमें स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। प्रशासन का कहना है कि यमुना की सफाई और पुनर्जीवन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी बेहद जरूरी है।
15 हजार लोगों ने संभाला सफाई अभियान का मोर्चा
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री गोपाल राय के अनुसार पहले दिन करीब 15 हजार लोगों ने सफाई अभियान में भागीदारी की. इनमें स्वयंसेवक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्य, सरकारी विभागों के कर्मचारी और विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी शामिल रहे. सामूहिक प्रयासों के जरिए कुछ ही घंटों में बड़ी मात्रा में कचरा हटाया गया.
मशीनों और आधुनिक तकनीक से चला यमुना सफाई अभियान
यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे सफाई अभियान में आधुनिक मशीनों और तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ने नदी और घाटों की सफाई को प्रभावी बनाने के लिए कई अत्याधुनिक उपकरणों को अभियान में शामिल किया है। सफाई अभियान के दौरान 8 ट्रैश स्कीमर, वीड हार्वेस्टर मशीनें, 28 नावें, 28 जेसीबी मशीनें, 84 PWD मेंटेनेंस वैन और उद्यान विभाग की 28 गाड़ियों को तैनात किया गया। इनकी मदद से नदी में जमा कचरे, जलकुंभी और घाटों पर फैली गंदगी को हटाने का काम किया गया। प्रशासन का कहना है कि यमुना की सफाई का यह अभियान केवल एक बार का प्रयास नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में भी इसे नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। उद्देश्य नदी की स्वच्छता बनाए रखना और यमुना तट को बेहतर पर्यावरणीय स्थिति में लाना है। यमुना की सफाई और पुनर्जीवन को लेकर लंबे समय से योजनाएं बनाई जाती रही हैं, लेकिन इस बार अभियान को जनभागीदारी और जमीनी स्तर की कार्रवाई से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।
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