बढ़ती आबादी और शहरी दबाव को देखते हुए दिल्ली-NCR के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मास्टर प्लान-2041 में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। मंगलवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित बैठक में क्षेत्रीय विकास को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 4 नए ग्रीनफील्ड शहर (greenfield cities) विकसित किए जाएंगे। इन शहरों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर परिवहन व्यवस्था, रोजगार के अवसरों और सुनियोजित विकास के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके अलावा दिल्ली पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए 6 राज्यों में काउंटर मैगनेट (counter-magnet) क्षेत्रों की पहचान की गई है।

दिल्ली-NCR के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान-2041 के तहत चार नए शहर विकसित किए जाएंगे। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर  ने बताया कि इन नए शहरों को ‘नमो सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इन शहरों को बेहतर परिवहन नेटवर्क के जरिए आसपास के शहरों से जोड़ा जाएगा। यहां आधुनिक आवास, रोजगार के अवसर, शिक्षा संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। इन नए शहरों के विकास के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करना और NCR में संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा देना है।

NCR की मौजूदा आबादी करीब 7.5 करोड़ बताई गई है। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में यह बढ़कर करीब 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही शहरीकरण की रफ्तार भी तेज होने की संभावना है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2031 तक NCR की करीब 57 प्रतिशत आबादी शहरी हो सकती है, जबकि 2041 तक यह आंकड़ा लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसी बढ़ती शहरी आबादी को देखते हुए नए शहरों और काउंटर मैगनेट क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली-NCR में बढ़ती आबादी और शहरी दबाव को कम करने के लिए नए ग्रीनफील्ड शहरों के साथ-साथ छह पड़ोसी राज्यों में फैले नौ काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों (CMA) की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों को इस उद्देश्य से विकसित किया जाएगा, ताकि रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए दिल्ली-NCR की ओर होने वाले पलायन को कम किया जा सके।  चिन्हित किए गए काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों में हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, पटियाला-राजपुरा, कानपुर-लखनऊ, बरेली, ग्वालियर और देहरादून शामिल हैं। इन शहरों में बुनियादी सुविधाओं, उद्योग, रोजगार और शहरी विकास को बढ़ावा देने की योजना है।

इसके अलावा, दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी नई रणनीति तैयार की जा रही है। प्रदूषण की स्थिति और क्षेत्रीय अंतर को देखते हुए NCR को तीन जोन में बांटने का प्रस्ताव है। योजना के तहत प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सख्त नियम और प्रतिबंध केवल दिल्ली और उससे सटे केंद्रीय NCR क्षेत्रों में लागू किए जा सकते हैं, जबकि राजधानी से दूर स्थित जिलों को कुछ प्रतिबंधों से राहत मिलने की संभावना है।

NCR की सीमा में नहीं होगा बदलाव

दिल्ली-NCR के मास्टर प्लान-2041 को लेकर हुई बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में तय किया गया कि NCR की मौजूदा सीमा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।दरअसल, हरियाणा सरकार लंबे समय से अपने कुछ जिलों को NCR से बाहर करने की मांग कर रही थी। हरियाणा की ओर से करनाल, जींद, पानीपत, भिवानी और महेंद्रगढ़ जिलों को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में इस मांग पर चर्चा के बाद फैसला लिया गया कि NCR की वर्तमान सीमा को बरकरार रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर विकास, परिवहन व्यवस्था और योजनाबद्ध शहरीकरण के लिए NCR का मौजूदा स्वरूप जरूरी है।

मास्टर प्लान-2041 के 5 बड़े फैसले

चार नए ग्रीनफील्ड शहरों का विकास

NCR में चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे, जिन्हें ‘नमो नोड्स’ के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

5,000 करोड़ रुपये की शुरुआती सहायता

नए शहरों के विकास के लिए सरकार की ओर से शुरुआती चरण में 5,000 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

हरियाणा के 5 जिलों को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव खारिज

हरियाणा की ओर से करनाल, जींद, पानीपत, भिवानी और महेंद्रगढ़ को NCR से बाहर करने की मांग की गई थी, लेकिन बैठक में फैसला लिया गया कि NCR की मौजूदा सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए NCR के 3 जोन

प्रदूषण की स्थिति के आधार पर NCR को तीन जोन में बांटने का प्रस्ताव है। दिल्ली और आसपास के केंद्रीय NCR क्षेत्रों में सख्त प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू किए जा सकते हैं, जबकि दूरस्थ जिलों को कुछ राहत मिल सकती है।

नौ काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों का विकास

दिल्ली पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नौ काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। इनमें हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, पटियाला-राजपुरा, कानपुर-लखनऊ, बरेली, ग्वालियर और देहरादून शामिल हैं।

प्रदूषण पर मिलकर करना होगा काम

दिल्ली-NCR के भविष्य को लेकर हुई बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रदूषण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक गंभीर और साझा चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सभी संबंधित राज्यों को मिलकर दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि चारों राज्य एक समान नीति, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के साथ काम करें तो प्रदूषण की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पौधारोपण और हरियाली बढ़ाने के अभियान लगातार चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं, विशेषज्ञों और सभी संबंधित हितधारकों को साथ लेकर योजनाएं बनानी होंगी, ताकि NCR को अधिक स्वच्छ, हरित और रहने योग्य बनाया जा सके।

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