अंबाला। पहले भरोसा जीता गया… फिर असली सोना दिखाया गया… और आखिर में ऐसा खेल हुआ कि बैंक अधिकारी भी समझ नहीं पाए कि वे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बन चुके हैं। एक ग्राहक, जो महीनों से बैंक के संपर्क में था, धीरे-धीरे इतना भरोसेमंद बन गया कि बैंक मैनेजर और गोल्ड लोन अधिकारी ने उस पर आंख मूंदकर विश्वास कर लिया। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह भरोसा लाखों की ठगी में बदलने वाला है।

कहानी बिल्कुल फिल्मी अंदाज में आगे बढ़ी। ब्लैक स्कॉर्पियो गाड़ी, लाखों रुपये की नकदी, असली सोना, हॉलमार्क का बहाना और फिर रास्ते में ढाबे पर खाना… सब कुछ किसी प्लान का हिस्सा था। बैंक अधिकारी साथ बैठे रहे और आरोपी बार-बार फोन पर बात करने व सिगरेट पीने के बहाने बाहर निकलता रहा। फिर एक ऐसा मौका आया, जब वह वापस ही नहीं लौटा।

मामला हरियाणा के अंबाला जिले की तेपला स्थित ICICI बैंक शाखा का है। पुलिस शिकायत के मुताबिक आरोपी कनिष्क सिंह चौहान अगस्त 2025 से बैंक का ग्राहक था। उसने बैंक मैनेजर गुलशन कुमार को झांसा दिया कि वह मुथुट फिनकॉर्प और एक निजी ज्वेलर के पास गिरवी रखे अपने सोने को ICICI बैंक में ट्रांसफर करवाना चाहता है। शुरुआती प्रक्रिया में बैंक ने करीब ₹14 लाख ट्रांसफर कर 144.8 ग्राम सोना छुड़वाया, जिसकी जांच वेंडर से कराई गई तो वह पूरी तरह असली निकला। इसी असली सोने ने बैंक अधिकारियों का भरोसा और मजबूत कर दिया।

इसके बाद 6 जून को बाकी 486 ग्राम सोना छुड़ाने के लिए बैंक वेंडर्स के जरिए आरोपी के खाते में ₹29 लाख और ट्रांसफर किए गए। ज्वेलर को कुल ₹45 लाख कैश पेमेंट होना था, जिसके लिए आरोपी ने और ₹15 लाख की मांग रख दी। शिकायत के अनुसार, आरोपी पर इतना भरोसा हो चुका था कि बैंक टीम ने अपने पर्सनल स्तर पर ₹15 लाख का इंतजाम कर उसे दे दिया।

इसके बाद आरोपी बैंक मैनेजर और गोल्ड लोन अधिकारी अनिल कुमार को अपनी ब्लैक स्कॉर्पियो में बैठाकर जगाधरी ले गया। वहां ज्वेलर की दुकान बंद मिलने पर वह दोनों अधिकारियों को पास के ‘चौधरी ढाबे’ पर खाना खिलाने ले गया। खाना खाते समय वह बार-बार फोन कॉल और सिगरेट का बहाना बनाकर बाहर जाता रहा और आखिरकार मौका मिलते ही ₹43 लाख कैश, 144.8 ग्राम असली सोना, मैनेजर का मोबाइल, पर्स और बैंक के जरूरी दस्तावेज लेकर फरार हो गया।

बताया गया है कि बदनामी के डर से बैंक अधिकारी करीब तीन दिन तक अपने स्तर पर आरोपी को तलाशते रहे, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस में शिकायत दी गई। साहा थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (धारा 316) और जालसाजी (धारा 318) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।