अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर सोमवार को चंदौली में किसान-मजदूर संगठनों ने जेल भरो आंदोलन कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में किसान, मजदूर और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने किसान-मजदूरों के हित में कई मांगों को लेकर आवाज बुलंद की.

आंदोलन के दौरान किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित एफटीए को किसान विरोधी बताते हुए इसका विरोध किया. साथ ही चार श्रम संहिताओं को लेकर केंद्र सरकार पर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया. नेताओं ने न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा मनरेगा में मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिदिन और साल में 200 दिन काम देने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठाई. इसके अलावा सरकारी स्कूल-कॉलेजों के निजीकरण का विरोध करते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई.

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किसान नेताओं ने चंदौली जैसे अतिपिछड़े जनपद में भूमि अधिग्रहण समेत स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग की. चकिया क्षेत्र की पहाड़ियों में हो रहे खनन पर रोक लगाने तथा जीएस, परती और बंजर भूमि को भूमिहीन गरीबों में बांटने की मांग भी प्रमुख रही. भाकपा माले नेता अनील पासवान ने कहा कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है. किसानों और मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

सीपीएम जिला मंत्री लालचंद एडवोकेट ने कहा कि किसान-मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी, रोजगार और भूमि का अधिकार मिलना चाहिए. बिजली और शिक्षा के निजीकरण से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. आंदोलन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम उपजिलाधिकारी विकास मित्तल को सौंपा. किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.