Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां महापौर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ की चर्चा है।

इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर भाजपा पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इन आरोपों पर पलटवार किया।
गहलोत का दावा, पार्षदों को दिए जा रहे करोड़ों के ऑफर
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्षदों को डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। गहलोत ने कहा कि ऐसे हालात में बोर्ड भाजपा के नहीं, बल्कि लक्ष्मीजी के बनेंगे।
गहलोत ने पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के कथित दुरुपयोग और अधिकारियों के जरिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के आरोप भी लगाए। इन आरोपों पर भाजपा नेताओं ने पलटवार किया है।
बेढम बोले, भाजपा के बोर्ड नोटों से नहीं जनादेश से बनेंगे
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने गहलोत के दो-दो करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त के आरोपों को गलत, मिथ्या और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के बोर्ड जनता के जनादेश और समर्थन से बन रहे हैं, नोटों से नहीं।
बेढम ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी बाड़ाबंदी और हॉर्स ट्रेडिंग की संस्कृति भाजपा पर थोपना बंद करे। उन्होंने 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए गहलोत सरकार के दौरान विधायकों की बाड़ाबंदी का मुद्दा उठाया। बेढम ने सवाल किया कि उस समय जयपुर और जैसलमेर में विधायकों को होटल में रखना हॉर्स ट्रेडिंग नहीं तो क्या था।
मदन राठौड़ बोले, कानून के अनुसार हो रहा काम
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी गहलोत के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कानून के अनुसार काम हो रहा है और किसी को कानून से ऊपर रहने की अनुमति नहीं है। राठौड़ ने निकाय चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को परिसीमन की प्रक्रिया पर आपत्ति थी तो उसे नियमानुसार अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। उन्होंने परिसीमन में गड़बड़ी के आरोपों को भी खारिज किया।
अब बोर्ड गठन पर टिकी नजर
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कई जगह भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के बीच समीकरण निर्णायक स्थिति में हैं। ऐसे में बोर्ड गठन की प्रक्रिया के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के आसार हैं। 309 नगरीय निकायों के चुनाव में 10,245 पार्षद सीटों के नतीजे सामने आए हैं और कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी है। फिलहाल एक तरफ गहलोत के आरोप हैं तो दूसरी तरफ भाजपा नेताओं का साफ इनकार। अब नजर उन निकायों पर है जहां बहुमत का आंकड़ा किसी एक दल के पक्ष में स्पष्ट नहीं है और बोर्ड बनाने के लिए अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।
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