लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने 87 दिन बाद 500 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है. चार्जशीट में आग लगने के कारण, लोगों के अंदर फंसने और बचाव कार्य में आई दिक्कतों समेत घटना से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है.

लखनऊ. राजधानी के अलीगंज में 22 जून को हुए अग्निकांड के मामले में पुलिस ने 87 दिन बाद कोर्ट में 500 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी. एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्रा ने चार्जशीट दाखिल किए जाने की पुष्टि की है.

पुलिस के मुताबिक, विवेचना के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं को जांच में शामिल किया गया. चार्जशीट में आरोपियों की भूमिका और पहचान के साथ आग लगने की वजह, लोगों के इमारत के अंदर फंसने की परिस्थितियों तथा बचाव अभियान के दौरान सामने आई दिक्कतों का भी उल्लेख किया गया है.

इन पर दाखिल चार्जशीट

मामले में भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. इसमें स्टूडियो संचालक सुरेश कुमार, राम कश्यप उपाध्याय और तुषार कृष्ण जायसवाल के नाम भी शामिल हैं.

वीरेंद्र शुक्ला का भाई और बिल्डिंग पार्टनर सुरेंद्र अभी फरार है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है और उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया अभी बाकी है.

22 जून को हुआ हादसा

अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित इमारत में 22 जून को अचानक आग लग गई थी. कुछ ही समय में आग के साथ धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जबकि उस समय कई लोग अंदर मौजूद थे.

आग और धुएं के कारण अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया. धुआं इतना अधिक था कि वहां फंसे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हुई. इस घटना में 15 लोगों की जान चली गई.

हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया था. इसके साथ ही इमारत में आग से बचाव के इंतजाम, लोगों के बाहर निकलने में आई बाधाएं और बचाव दल के सामने आई मुश्किलों को लेकर भी सवाल उठे थे.

सुरक्षा इंतजामों की जांच

पुलिस ने अपनी विवेचना में यह भी देखा कि आग लगने के बाद ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण लोग इमारत के अंदर फंस गए. इमारत की बनावट और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं से जुड़े पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया.

पुलिस ने यह पता लगाने पर भी ध्यान दिया कि बचाव अभियान के दौरान किन कारणों से दिक्कतें सामने आईं. इस तरह जांच को केवल आग लगने के कारण तक सीमित नहीं रखा गया.

एसआईटी ने भी की जांच

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. जांच के दौरान घटनास्थल की स्थिति, भवन से संबंधित दस्तावेज, वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं और घटना से जुड़े लोगों के बयान समेत कई बिंदुओं की पड़ताल की गई.

अब विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने 500 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है. एसीपी शशि प्रकाश मिश्रा के अनुसार, चार्जशीट में घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है.