हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में जोमैटो डिलीवरी बॉय से मोबाइल लूट के मामले का पुलिस ने महज 72 घंटे में खुलासा कर दिया। आधी रात एबी रोड पर हुई वारदात में ऑटो सवार आरोपियों ने डिलीवरी बॉय को कुछ देर के लिए अपने साथ बैठाया और मौका देखकर उसका मोबाइल छीनकर फरार हो गए थे। पुलिस ने करीब 120 CCTV कैमरों के फुटेज खंगालने के साथ UPI पेमेंट और मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच के जरिए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

आधी रात डिलीवरी के लिए निकला था युवक

पुलिस के मुताबिक 7 अगस्त 2026 की रात करीब 2 बजे फरियादी हिम्‍मत सिंह जाटव एबी रोड से अपनी मोटरसाइकिल पर एलआईजी चौराहे की तरफ जा रहा था। वह पिछले करीब दो साल से जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम कर रहा है।

गुरुद्वारा के पास पहुंचने पर पीछे से एक ऑटो चालक आया। ऑटो में पहले से एक युवक और युवती बैठे थे। ऑटो में बैठे युवक ने फरियादी को गाली-गलौज की और अचानक उसका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद ऑटो चालक ने तेजी से ऑटो दौड़ा दिया।

फरियादी ने मोटरसाइकिल से ऑटो का पीछा किया, लेकिन ऑटो सवार आरोपी मौके से भाग निकले। घटना के बाद एमआईजी थाने में लूट का केस दर्ज किया गया।

120 CCTV कैमरों ने खोली आरोपियों की राह

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एमआईजी पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम बनाई। पुलिस ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों के भागने वाले संभावित रास्तों के CCTV फुटेज खंगालना शुरू किया।

एलआईजी चौराहे से लेकर उज्जैन रोड तक करीब 120 कैमरों के फुटेज की जांच की गई। फुटेज में आरोपी ऑटो के साथ भागते हुए नजर आए। पुलिस ने ऑटो के रूट को ट्रेस करते हुए लोटस चौराहा, रोबोट चौराहा, रेडिसन चौराहा, विजय नगर चौराहा, मेघदूत होते हुए लवकुश चौराहा और उज्जैन रोड तक कैमरों की पड़ताल की। लवकुश चौराहे के बाद ऑटो कैमरों की नजर से गायब हो गया, लेकिन पुलिस ने यहीं से एक और अहम कड़ी जोड़ ली।

बिरयानी ने आरोपियों तक पहुंचाया

पुलिस जांच के दौरान एक बिरयानी दुकान से अहम सुराग मिला। टीम को पता चला कि घटना वाली रात एक ऑटो चालक और उसके साथ एक युवक-युवती बिरयानी खाने के लिए दुकान पर पहुंचे थे।

पुलिस के मुताबिक तीनों ने बिरयानी खाई थी। इसके बाद आरोपियों ने UPI के जरिए 400 रुपये का भुगतान किया, जबकि बिरयानी की कीमत 150 रुपये थी और बाकी रकम नकद वापस ली गई थी। यही UPI ट्रांजैक्शन पुलिस के लिए बड़ा सुराग बन गया।

UPI नंबर से निकली मोबाइल लोकेशन

पुलिस ने UPI डिटेल के आधार पर मोबाइल नंबर हासिल किया और उसकी तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल की लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस ऑटो चालक तक पहुंची।

पुलिस ने साइबर टीम की मदद से ऑटो चालक राज को ओम विहार कॉलोनी, पल्हर नगर क्षेत्र से ऑटो सहित घेराबंदी कर पकड़ा। पूछताछ में राज ने अपने साथी जय चंदेरी के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने जय चंदेरी को भी ऑटो में ही पकड़ लिया। पूछताछ में दोनों ने घटना में शामिल होना स्वीकार किया।

लूटा गया मोबाइल और ऑटो बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल ऑटो रिक्शा और फरियादी से लूटा गया मोबाइल बरामद कर लिया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

गिरफ्तार आरोपी

जय चंदेरी, 22 वर्ष 

राज रणौजा, 20 वर्ष

दोनों ऑटो चालक, आपस में दोस्त

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी ऑटो चालक हैं और आपस में दोस्त हैं। घटना वाली रात जय चंदेरी अपने दोस्त राज के ऑटो से एक महिला मित्र को उज्जैन घुमाने ले जाने की बात कहकर निकला था। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने पहले बीयर पी और फिर बिरयानी खाई। इसके बाद उन्होंने जोमैटो डिलीवरी बॉय को निशाना बनाया और मोबाइल लूट लिया।

पुलिस की तेजी से बड़ा खुलासा

एमआईजी पुलिस ने इस पूरे मामले में CCTV फुटेज, UPI पेमेंट, मोबाइल नंबर, लोकेशन और पूछताछ को आपस में जोड़कर आरोपियों की पहचान की। वारदात के महज 72 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी को पुलिस की तकनीकी जांच और टीमवर्क की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

अब पुलिस आरोपियों से यह भी पूछताछ कर रही है कि क्या दोनों ने इससे पहले भी इस तरह की कोई वारदात की है और उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

इनकी रही अहम भूमिका

पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी एमआईजी सीबी सिंह, उपनिरीक्षक शैलेन्द्र अग्रवाल, प्रधान आरक्षक राजकुमार चौबे, प्रधान आरक्षक प्रवीण पंवार, प्रधान आरक्षक लोकेन्द्र सिंह, प्रधान आरक्षक राजू दबाने, आरक्षक कपिल सोनानिया, आरक्षक संजू मीणा और साइबर टीम के आरक्षक प्रवीण सिंह चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

स्पेशल एंगल: इस मामले में खास बात यह रही कि पुलिस ने सिर्फ CCTV के भरोसे आरोपियों की तलाश नहीं की, बल्कि कैमरों से गायब हुए ऑटो का सुराग एक बिरयानी दुकान के UPI पेमेंट से निकाला। यही डिजिटल ट्रांजैक्शन आखिरकार पुलिस को आरोपियों के मोबाइल और लोकेशन तक ले गया।

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