पटना की सियासत में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद एक नया राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस प्रतिष्ठित सीट पर जन सुराज की शानदार जीत के तुरंत बाद, इलाके में प्रशांत किशोर के खिलाफ एक तीखा पोस्टर वार शुरू हो गया है। इन पोस्टर्स के जरिए चुनाव के दौरान जन सुराज द्वारा पुलिस और चुनाव आयोग पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर तीखे सवाल पूछे गए हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है।

​पोस्टर्स के जरिए प्रशांत किशोर से सीधा सवाल

​बांकीपुर क्षेत्र में चस्पा किए गए इन पोस्टर्स में बड़े अक्षरों में प्रशांत किशोर को संबोधित करते हुए सीधे सवाल किए गए हैं। पोस्टर्स में लिखा गया है कि अब जबकि वे चुनाव जीत चुके हैं, तो क्या उन्हें बिहार पुलिस और संवैधानिक संस्था यानी चुनाव आयोग पर लगाए गए पक्षपात के झूठे आरोपों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगनी चाहिए? इन पोस्टर्स पर किसी भी राजनीतिक दल का आधिकारिक नाम नहीं लिखा है, बल्कि इन्हें ‘बांकीपुर की जनता’ के नाम से जारी किया गया है।

​पुराने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को बनाया गया आधार

​इन पोस्टर्स में जन सुराज के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स और वीडियो के स्क्रीनशॉट्स का हवाला दिया गया है। इसके माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पार्टी ने किस प्रकार प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल उठाए थे। पोस्टर्स में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों को आधार बनाया गया है:

  • ​चुनाव आयोग पर टिप्पणी: जन सुराज के आधिकारिक हैंडल से किए गए उस पोस्ट को हाईलाइट किया गया है जिसमें चुनाव आयोग पर एक दल विशेष के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया गया था।
  • ​पटना पुलिस और एसएसपी की कार्रवाई: चुनाव के दौरान पटना पुलिस और एसएसपी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में प्रशांत किशोर की प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी इसमें शामिल किया गया है।
  • ​औपचारिक शिकायत: चुनाव आयोग के समक्ष पटना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतों को भी पोस्टर का हिस्सा बनाया गया है।

​जीत के बाद बदला सियासी समीकरण और टकराव

​बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बेहद चौंकाने वाला रहा, क्योंकि जिस सीट को लंबे समय से भाजपा का गढ़ माना जाता था, वहां प्रशांत किशोर की पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। इस जीत के बाद विरोधियों का तर्क है कि यदि चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन वास्तव में जन सुराज के खिलाफ पक्षपात कर रहे थे, तो यह पार्टी चुनाव जीतने में कैसे सफल हो गई?
​हालांकि जन सुराज इस जीत को बिहार की राजनीति में एक नए और मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए इन पोस्टर्स ने यह साफ कर दिया है कि चुनावी मैदान की जीत के बाद भी राजनीतिक दलों और संस्थाओं के बीच का यह सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है।