संजय पाटीदार, भोपाल। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के RTO को लेकर दिए एक बयान पर अब सियासत गरमा गई है। गडकरी ने मंच से RTO अफसरों पर तंज कसते हुए कहा था, ‘अधिकारी गांधीवादी हैं। गांधी के नोट देखते ही फटाफट ठप्पे मार देते हैं।’ गडकरी का ये तंज भले RTO में कथित भ्रष्टाचार को लेकर था लेकिन अब इस बयान को लेकर महात्मा गांधी और गोडसे तक पहुंच गया है और अब इस पर खूब सियासत हो रही है।
गडकरी का RTO पर एक तंज… कांग्रेस का गांधी के अपमान का आरोप और बीजेपी का गोडसे के बहाने पलटवार अब RTO में भ्रष्टाचार का मुद्दा सियासी बयानबाजी के साथ गांधी बनाम गोडसे की बहस तक पहुंच गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने गडकरी के बयान को महात्मा गांधी का अपमान करार दिया और देश से माफी मांगने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि मध्यप्रदेश की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भ्रष्टाचार से घिरी हुई है और भ्रष्टाचार का गांधीवादी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। कुणाल चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार गोडसेवादी विचारधारा के लोग करते हैं।
सियासी बयान बाजी के बाद कांग्रेस के तंज करने के बाद भाजपा कहां पीछे रहने वाली थी। बीजेपी ने तुरंत कांग्रेस के बयानों का पलटवार करते हुए तीखा हमला किया। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने कहा कि प्रदेश सरकार RTO के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीति के केंद्र में गोडसे को रखना चाहती है। जबकि बीजेपी राजनीति के केंद्र में महात्मा गांधी को रखना चाहती है। कांग्रेस हमेशा नाथूराम गोडसे के पीछे हो खड़े होने की कोशिश करती है।
RTO पर आरोपों से शुरू हुआ मामला अब गांधी और गोडसे की विचारधाराओं तक पहुंच गया है। कांग्रेस जहां गडकरी के बयान को महात्मा गांधी के अपमान से जोड़ रही है तो भाजपा विपक्षी दल कांग्रेस पर हमेशा नाथूराम गोडसे के पीछे हो खड़े होने की कोशिश राजनीति करने आरोप लगा रही है। अब देखना यह है कि आखिर बयान और सियासत से आगे बढ़कर क्या भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
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