BFI Suspends Secretary General: बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) ने अपने महासचिव प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अधिकारों का दुरुपयोग करने, वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और जांच प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फेडरेशन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अंतरिम है। जांच पूरी होने या सक्षम अधिकारी के आदेश में बदलाव होने तक निलंबन प्रभावी रहेगा।
बीएफआई ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा कि प्रमोद कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। निलंबन के दौरान वह महासचिव के तौर पर कोई आधिकारिक काम नहीं कर सकेंगे। उन्हें इस पद से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल करने और फेडरेशन की ओर से निर्देश या आदेश जारी करने से भी रोक दिया गया है।

चैंपियनशिप रद्द होने के मामले में भी जांच
प्रमोद कुमार के खिलाफ कार्रवाई की एक प्रमुख वजह बीएफआई एलीट पुरुष और महिला ओपन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 को रद्द किए जाने के मामले में चल रही जांच है। यह प्रतियोगिता हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक आयोजित होनी थी।
फेडरेशन के आदेश के मुताबिक, कुमार पर इस मामले की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप है। इसके अलावा, स्वतंत्र जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और उसमें रुकावट डालने के लिए कथित तौर पर गैरकानूनी और दुर्भावनापूर्ण नोटिस जारी करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
बीएफआई का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से उसके कार्यक्रमों के संचालन और संस्थान की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है। हालांकि, निलंबन आदेश में दर्ज आरोपों पर अभी जांच की जा रही है। इन्हें अंतिम रूप से साबित हुआ मामला नहीं माना गया है।
अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से बढ़ा था विवाद

प्रमोद कुमार के निलंबन के बीच बीएफआई में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद भी चर्चा में है। इससे पहले कुमार ने फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने इसकी वजह आपसी भरोसा खत्म होने और प्रशासनिक व्यवस्था के गंभीर रूप से विफल होने को बताया था।
इसके बाद कुमार ने अध्यक्ष अजय सिंह और बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि दोनों ने सिंह के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए उन्हें आपराधिक धमकी दी थी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर अजय सिंह और कर्नल अरुण मलिक का पक्ष शामिल नहीं है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
निलंबन के दौरान नहीं जारी कर सकेंगे नोटिस या आदेश
बीएफआई के आदेश में प्रमोद कुमार के लिए कई पाबंदियां तय की गई हैं। निलंबन की अवधि में वह महासचिव के पद से जुड़ी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे और न ही इस पद की आधिकारिक जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
उन्हें फेडरेशन के नाम पर किसी भी तरह का पत्राचार करने, नोटिस भेजने, निर्देश देने या आदेश जारी करने से रोक दिया गया है। इसके साथ ही जांच समिति की कार्यवाही में सीधे या किसी अन्य माध्यम से हस्तक्षेप करने पर भी रोक लगाई गई है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि कुमार जांच से जुड़े गवाहों, अधिकारियों या दूसरे लोगों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर सकेंगे। इन पाबंदियों का मकसद जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाना है।
जांच समिति को देने होंगे दस्तावेज और जवाब
फेडरेशन ने प्रमोद कुमार को जांच समिति के साथ पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें जांच के दौरान मांगे जाने वाले दस्तावेज, रिकॉर्ड, स्पष्टीकरण और अन्य जरूरी जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी।
बीएफआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि निलंबन को आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं समझा जाना चाहिए। यह जांच पूरी होने तक उठाया गया अंतरिम कदम है। आगे की प्रक्रिया फेडरेशन के संविधान में तय प्रावधानों, सुरक्षा उपायों और समीक्षा की शर्तों के तहत चलेगी।
आदेश तोड़ने पर हो सकती है आगे की कार्रवाई
बीएफआई ने चेतावनी दी है कि निलंबन आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने, अधिकारों का दुरुपयोग करने या फेडरेशन की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसा होने पर फेडरेशन के संविधान और लागू नियमों के तहत अतिरिक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल प्रमोद कुमार का निलंबन अंतरिम है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष और सक्षम अधिकारी के अगले आदेश से ही इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

