Dharm Desk – हरियाली तीज का पर्व हर सुहागिन स्त्री के लिए बहुत खास माना जाता है। यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से उपवास रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए तीज का उपवास करती हैं। इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। हरियाली तीज को शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। इसे श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है।हरियाली तीज के दिन विवाहित स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर पूजा करती हैं। कई जगहों पर औरते अपनी सखियों के साथ पेड़ों पर झूले डालती हैं और सावन के लोकगीत गाकर इस त्योहार की खुशियां मनाती हैं।

हरियाली तीज कब मनाई जाएगी
सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस वर्ष 14 अगस्त को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का यह त्यौहार 15 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा।
शिवसाध्य योग का बन रहा शुभ संयोग
इस वर्ष हरियाली तीज पर शिव और साध्य योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों योगों को शुभ और प्रभावशाली माना गया है। इस संयोग में भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करने से भत्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज के दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर उसे तोरण और मंडप से सजा लेना चाहिए,इसके बाद एक चौकी पर मिट्टी में गंगाजल मिलाकर भगवान शंकर श्री गणेश माता पार्वती और उनकी सखियों की प्रतिमाएं बनाएं। सुहाग की सभी सामग्रिया एक थाली में रखकर माता पार्वती को चढ़ाए इसके बाद भगवान शंकर को वस्त्र अर्पित करें और सभी देवी-देवताओं का धयान करते हुए षोडशोपचार विधि से पूजा करें। और अंत में हरियाली तीज की कथा पढ़ें या किसी ब्राह्मण से सुनें। कई क्षेत्रों में औरतें रातभर जागरण और कीर्तन भी करती हैं।
हरियाली तीज के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 6 बजकर 43 मिनट से रात 11 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहर्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। वहीं, विजय मुहूर्त शाम 4 बजकर 18 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है हरियाली तीज
हरियाली तीज को भगवान शंकर और माता पार्वती के पुनर्मिलन का पर्व माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शंकर ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की पूजा का खास महत्व है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए उपवास रखती हैं। यह पर्व हरियाली प्रेम सौंदर्य और शिव-शक्ति के मिलन का संदेश देता है।


