Dharm Desk – सावन के महीने में भगवान शंकर की आराधना का विशेष महत्व होता है। सभी शिवभक्त मंदिर जाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक तो करते ही हैं साथ ही घर पर भी पार्थिव शिव लिंग बनाकर पूजा-अर्चना करते हैं। शिवलिंग बनाते समय सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि अगर नदी तालाब या किसी पवित्र जगह की मिट्टी उपलब्ध न हो तो क्या घर के गमले की मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाया जा सकता है? इसका जवाब है- हां, घर की साफ और शुद्ध मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाया जा सकता है। विशेष रूप से घर में लगे तुलसी या बेलपत्र के पौधे के गमले की साफ मिट्टी का भी उपयोग किया जा सकता है।

तुलसी या बेल के गमले की मिट्टी

तुलसी और बेल दोनों ही हिंदू धर्म में पूजनीय पौधे माने गए हैं। भगवान शंकर की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। इसलिए यदि घर में लगे बेल या तुलसी के पौधे के गमले से थोड़ी सी साफ मिट्टी उपलब्ध हो जाए तो उससे पार्थिव शिवलिंग बनाया जा सकता है। परन्तु मिट्टी निकालते समय इस बात का भी ध्यान रखे कि पौधे की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचे और जरूरत से ज्यादा मिट्टी भी नहीं निकालनी चाहिए।

पार्थिव शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व

सावन मास भगवान शंकर को समर्पित माना जाता है। यही वजह है कि इस पूरे महीने में शिवभक्त अलग-अलग तरीके से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इनमें पार्थिव शिव लिंग बनाकर पूजा करना भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है। पार्थिव शिवलिंग का अर्थ ही है मिट्टी से बनाया गया शिवलिंग। इसमें मिट्टी के माध्यम से शिव तत्व की पूजा की जाती है और भक्त अपनी श्रद्धा को भगवान शंकर के चरणों में अर्पित करता है।

ऐसे करें शिवजी की आराधना

पार्थिव शिवलिंग तैयार करने के बाद उसे स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान शिवजी का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, शदह आदि से अभिषेक कर सकते हैं। भगवान शंकर को बेलपत्र, सफेद फूल, अक्षत और धतूरा अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें। सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मन में अपनी मनोकामना रखकर शंकरजी का ध्यान करना विशेष भावपूर्ण माना जाता है।