हेमंत शर्मा, इंदौर। मुख्यमंत्री को लिखे गए कथित पत्र को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा। उनका कहना है कि वायरल हो रहे इस कथित पत्र से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने यह खबर प्रकाशित की है, वही बताएं कि यह जानकारी उन्हें कहां से मिली। कैलाश के इस बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने उन पर तीखा हमला बोला हैं।
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि जब एक बड़े अखबार ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर मंत्री को अपने विभाग की समस्याएं दिखाई दे रही थीं तो ढाई साल तक उन्होंने इस पर आवाज क्यों नहीं उठाई। सज्जन वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जलभराव, दूषित पानी और पेयजल जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, लेकिन अब इन मुद्दों को उठाया जा रहा है।
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सज्जन वर्मा बोले- अधिकार नहीं हैं तो मंत्री पद छोड़ दे
उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने खुद को “हाथ कटा ठाकुर” बताया था। वर्मा ने कहा कि अगर उन्हें लगता था कि उनके पास अधिकार नहीं हैं तो उन्हें मंत्री पद छोड़ देना चाहिए था। सज्जन वर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि पितृ पर्वत पर उनके बैठने की पूरी व्यवस्था है। वहां जाकर हनुमान जी की सेवा करें, तो इंदौर को कैलाश विजयवर्गीय के रूप में एक नया महामंडलेश्वर मिल जाएगा। बस इतना ध्यान रखें कि वहां चंदा चोरी न हो।
पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का भी जिक्र
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का भी जिक्र किया। वर्मा ने कहा कि बैठक में राहुल गांधी के उस बयान पर चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने पार्टी के भीतर मौजूद “स्लीपर सेल” की पहचान कर उन्हें बाहर करने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने भी देवास में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में इसी मुद्दे पर कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी थी।
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दिग्विजय के ‘दलाल’ शब्द वाले बयान पर दी सफाई
दिग्विजय सिंह के “दलाल” शब्द वाले बयान पर भी सज्जन वर्मा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह किसी व्यक्ति के उपनाम का जिक्र कर रहे थे, लेकिन शब्दों के चयन की वजह से विवाद पैदा हो गया। बाद में दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट कर दी। कथित पत्र को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं और मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
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