Rajasthan News: अरावली पर्वतमाला से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। खासतौर पर राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की नई परिभाषा को लेकर तीखा विरोध दर्ज किया जा रहा है। इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई तय की है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली वैकेशन बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं। मामला सीजेआई के वैकेशन कोर्ट में पांचवें नंबर पर सूचीबद्ध है। माना जा रहा है कि सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों के लिए अहम निर्देश जारी हो सकते हैं।
केंद्र की सिफारिश के बाद बढ़ा विरोध
20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश को स्वीकार किया था। इसके तहत केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली रेंज का हिस्सा मानने का प्रस्ताव रखा गया। यह मामला वर्ष 1985 से न्यायालय में विचाराधीन है और गोदावर्मन व एम.सी. मेहता मामलों के जरिए अरावली को अब तक व्यापक संरक्षण मिलता रहा है।
नई परिभाषा सामने आने के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध तेज हो गया। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों का कहना है कि छोटी पहाड़ियों को अरावली से बाहर करने से खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। वहीं, केंद्र सरकार का तर्क है कि इस फैसले को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और अरावली के संरक्षण में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
पूर्व अधिकारी की याचिका भी लंबित
इससे पहले हरियाणा वन विभाग के पूर्व अधिकारी आर.पी. बलवान ने भी नई परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने गोदावर्मन मामले में याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार, राजस्थान, हरियाणा और पर्यावरण मंत्रालय को पक्षकार बनाया। कोर्ट ने सभी को नोटिस जारी कर दिया है और इस याचिका पर शीतकालीन अवकाश के बाद सुनवाई होनी है।
खनन पट्टों पर लगी रोक
विवाद गहराने के बीच केंद्र सरकार ने 24 दिसंबर को अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अरावली श्रृंखला में किसी भी नई खनन लीज को मंजूरी नहीं दी जाएगी और सभी राज्य सरकारों को इस पर सख्ती से अमल करना होगा। मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैली इस महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला को अनियंत्रित खनन से बचाना है।
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