दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) ने आपराधिक न्याय प्रणाली में सामने आई एक गंभीर और चौंकाने वाली चूक पर सख्त रुख अपनाया है। उम्रकैद की सजा पा चुका एक हत्या का दोषी पैरोल पर रिहा होने के बाद 13 साल तक फरार रहा, लेकिन इस दौरान प्रशासन को इसकी कोई जानकारी तक नहीं मिली। इस मामले पर जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे ‘सिस्टम की बड़ी विफलता’ करार दिया।

यह मामला सोनू नाम के एक अपराधी से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2009 में हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सोनू ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद दिसंबर 2010 में उसकी सजा दो महीने के लिए निलंबित कर दी गई।

नियमों के अनुसार उसे दो महीने बाद जेल लौटना था, लेकिन वह वापस नहीं आया और इसके बाद वह वर्षों तक फरार रहा। हैरानी की बात यह है कि सितंबर 2012 में हाईकोर्ट ने सोनू की अपील खारिज कर दी थी, इसके बावजूद पुलिस और जेल प्रशासन उसे पकड़ने में नाकाम रहे। आखिरकार करीब 13 साल बाद, 13 अक्टूबर 2025 को उसे गिरफ्तार किया जा सका।

कोर्ट की फटकार: ‘खोखली हो रही है विश्वसनीयता’

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस देरी को ‘असाधारण’ करार देते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की मानवीय चूक नहीं, बल्कि ट्रायल कोर्ट, जेल प्रशासन और पुलिस के बीच तालमेल की गंभीर कमी का परिणाम है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “सजा मिलने के बावजूद यदि कोई अपराधी एक दशक से अधिक समय तक खुलेआम घूमता रहे, तो यह आम आदमी के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसे को कमजोर करता है।”

भविष्य के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी

भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि यदि किसी दोषी की सजा निलंबित होती है, तो इसकी जानकारी तुरंत ट्रायल कोर्ट, संबंधित थाना और जेल अधीक्षक को दी जाएगी।

जमानत या सजा निलंबन की अवधि समाप्त होते ही आत्मसमर्पण की स्पष्ट तारीख तय की जाएगी। यदि दोषी तय समय पर हाजिर नहीं होता, तो जेल अधीक्षक तत्काल इसकी सूचना ट्रायल कोर्ट को देगा और पुलिस को तुरंत गिरफ्तारी के आदेश जारी करने होंगे। इसके अलावा अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति सभी आपराधिक अदालतों, पुलिस आयुक्त और जेल विभाग को भेजी जाए, ताकि इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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