पटना। बिहार की राजधानी के फुलवारी शरीफ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पिछले छह महीनों से उन्हें उनकी मेहनत का इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) नहीं मिला है, जिसके चलते लगभग 180 कार्यकर्ताओं का घर चलाना दूभर हो गया है।

​त्योहारों की खुशियां हुईं फीकी

​आशा कार्यकर्ता संगीता देवी, रूबी कुमारी, शमा प्रवीण और गायत्री देवी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि भुगतान न होने से दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के बाद अब होली भी फीकी बीत गई। परिवार की बुनियादी जरूरतों और दैनिक खर्चों के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

​स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़, फिर भी अनदेखी

​आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग और जनता के बीच सबसे अहम कड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित प्रसव, बच्चों का टीकाकरण और परिवार नियोजन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इन्हीं के कंधों पर होती हैं। इतनी निष्ठा से काम करने के बावजूद समय पर भुगतान न होना उनकी सेवाओं के प्रति तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है।

​बढ़ी हुई राशि का भी लाभ नहीं

​फुलवारी शरीफ सीएचसी में तैनात 180 आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि सरकार ने उनके मासिक प्रोत्साहन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया है, लेकिन भुगतान में देरी की वजह से इस बढ़ोतरी का कोई व्यावहारिक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

​फंड की कमी बनी बाधा

​भुगतान में देरी पर स्पष्टीकरण देते हुए सीएचसी के प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक (BCM) अंबिका प्रसाद ने बताया कि सरकारी फंड की अनुपलब्धता के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि फंड प्राप्त होते ही सभी का बकाया भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कर दिया जाएगा। फिलहाल, आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से जल्द से जल्द राहत की गुहार लगाई है।