भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार राज्य के आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है. लंबे समय से प्रतीक्षित ‘पेसा’ (PESA- Panchayat Extension to Scheduled Areas) कानून को राज्य में लागू करने की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं. संभावना है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है.

राज्य सरकार इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है. इसके लिए अब तक 41 सरकारी विभागों के साथ गहन विचार-विमर्श किया जा चुका है. आज इस कानून के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है. गौरतलब है कि 1996 में केंद्रीय पेसा कानून आने के बावजूद ओडिशा में इसे अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका था.

आदिवासियों को मिलेगा स्वशासन का अधिकार

पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में रहने वाले आदिवासी समुदायों को स्वशासन का अधिकार देना है. इसके लागू होने से जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी. प्रत्येक गांव में एक स्वतंत्र ग्राम सभा होगी, जो अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामुदायिक संपत्तियों का संरक्षण करेगी. किसी भी भूमि अधिग्रहण या विस्थापन से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेना अनिवार्य होगा.

ओडिशा में इस कानून के लागू होने से राज्य के 10 जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लाखों आदिवासी लाभान्वित होंगे. विभिन्न आदिवासी संगठन और समुदाय लंबे समय से इस कानून को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत थे. सरकार का यह कदम न केवल आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक विकास में भी एक मील का पत्थर साबित होगा.