Delhi IRS Officer Assault Case: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 26 साल पुराने केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए सीबीआई (CBI) के जॉइंट डायरेक्टर रामनीश गीर (CBI Joint Director Ramnish Gir) समेत दो अधिकारी को दोषी करार दिया है। तीस हजारी कोर्ट ने साल 2000 में आईआरएस अधिकारी के घर पर दुर्भावनापूर्ण ढंग से छापेमारी के लिए सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी की गिरफ्तारी सीएटी के आदेश को रद्द करने के लिए एक सुनियोजित साजिश थी। तीस हजारी कोर्ट के जज शशांक नंदन भट्ट ने CBI के इंस्पेक्टर वीके पांडे और डीएसपी रामनीश को IPC की धारा 323, 427 और 448 के तहत दोषी माना है।
1994 बैंच के CBI अधिकारी रामनीश गीर (CBI Joint Director Ramnish Gir) को राष्ट्रपति ने पुलिस मेडल पदक से सम्मानित किया था। रमनीश मौजूदा समय में गुवाहाटी में CBI के जॉइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात है। साल 2000 में जब यह छापेमारी हुई थी तब रमनीश पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे। वहीं शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल हैं, जो 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। उस समय दिल्ली जोन में प्रवर्तन उप निदेशक के पद पर कार्यरत थे। उन्हें सीबीआई के दोनों मामलों में बरी कर दिया था।
कोर्ट ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि 19 अक्टूबर 2000 को आरोपियों द्वारा ली गई तलाशी और गिरफ्तारी की पूरी कार्यवाही कानून द्वारा उन्हें दी गई शक्तियों का उल्लंघन थी। उन्होंने कहा कि उस कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को निष्प्रभावी करना था, जिसमें शिकायतकर्ता आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के निलंबन की समीक्षा का निर्देश दिया गया था। अदालत ने दोनों अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाने के लिए मामले को अगली कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया है।
यह है पूरा मामला
दरअसल, 1985 बैच के IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर 2000 की सुबह CBI टीम उनके पश्चिम विहार स्थित घर में जबरन घुस गई और दरवाजा तोड़ दिया था। उनके साथ मारपीट की और गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। अशोक अग्रवाल का कहना था कि यह कार्रवाई उनके और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद का बदला थी और उनके सस्पेंशन की समीक्षा के आदेश को कमजोर करने के लिए की गई थी। वहीं आरोपियों ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने जो किया, वह उनकी ड्यूटी का हिस्सा था और उन्हें CrPC की धारा 197 के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
बिना वजह दरवाजा तोड़ना है मिसचीफ
तीस हजारी कोर्ट ने कहा कि बिना वजह दरवाजा तोड़ना मिसचीफ है। किसी के घर में गलत इरादे से घुसना क्रिमिनल ट्रेसपास की श्रेणी में आता है। साथ ही कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान अशोक अग्रवाल के हाथ में चोट आई, जो उन्हें घसीटने और धक्का-मुक्की करने की वजह से लगी आरोपी इस चोट का कोई सही कारण नहीं बता पाए। अंत में अदालत ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने मिलकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ आरोपों को पूरी तरह साबित कर दिया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
शनिवार के एक ऐतिहासिक फैसले में, रामनीश जो वर्तमान में सीबीआई के संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं (जो वर्ष 2000 में सीबीआई के एसआईयू-8 में पुलिस उप अधीक्षक के पद पर तैनात थे), और वीके पांडे, दिल्ली के सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त (उस समय सीबीआई के एसआईयू-9 में इंस्पेक्टर) को चोट पहुंचाने, उपद्रव करने, आपराधिक अतिक्रमण करने और सामान्य इरादे से किए गए कृत्यों के लिए दोषी ठहराया गया है।
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