लोकसभ में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद विपक्ष का उत्साह सातवें आसमान पर है. यही वजह है कि, विपक्ष एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए सक्रिय हो गया हैं. सूत्रों के मुताबिक विपक्ष ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एक बार फिर प्रस्ताव लाने का फैसला किया है. यह निर्णय तब आया है जब विपक्ष ने संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक को विफल कर दिया. पहले दिए गए नोटिस खारिज होने के बावजूद विपक्ष ने इस मुद्दे पर नया दांव खेलने की तैयारी शुरू कर दी है.

प्लान पर काम शुरू

सूत्रों के अनुसार कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता इस दिशा में आपसी बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर नया प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित कई दलों के कम से कम पांच वरिष्ठ सांसद मिलकर इस नए नोटिस का मसौदा तैयार कर रहे हैं. हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि यह प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा या राज्यसभा में, या फिर दोनों सदनों में एक साथ पेश किया जाएगा, जैसा कि पिछली बार किया गया था. नया प्रस्ताव अगले सप्ताह तक पेश किए जाने की संभावना है.

200 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की कोशिश

इस बार विपक्ष अपने प्रयास को और मजबूत बनाना चाहता है. बताया जा रहा है कि विपक्षी दल कम से कम 200 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की रणनीति बना रहे हैं. विपक्ष ने लोकसभा से कम से कम 200 सांसदों और राज्यसभा से लगभग 80 सांसदों के हस्ताक्षर प्राप्त करने की योजना बनाई है ताकि नए नोटिसों के माध्यम से एक संदेश दिया जा सके, जबकि उनके पिछले नोटिसों को 6 अप्रैल को विभिन्न आधारों पर खारिज कर दिया गया था. एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, ‘हम इस बार मजबूत संदेश देना चाहते हैं और यह दिखाना चाहते हैं कि पिछली बार समर्थन कम आंका गया था’.

विपक्ष ने लगाए थे गंभीर आरोप

इससे पहले दिए गए नोटिस में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. इनमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने में विफलता, कार्यपालिका के दबाव में काम करने और निष्पक्षता पर सवाल शामिल थे. इसके अलावा, चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी, डेटा साझा न करने और बिहार सहित कई राज्यों में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने जैसे आरोप भी लगाए गए थे.

स्पीकर और चेयरमैन ने खारिज किए थे आरोप

12 मार्च को राज्यसभा के 63 सदस्यों और लोकसभा के 130 सदस्यों ने मुख्य आयुक्त के पद से कुमार को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था. हालांकि इसे 6 अप्रैल को दोनों सदनों के अध्यक्षों ने खारिज कर दिया था. नोटिस को खारिज करते हुए, राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा था कि विपक्ष संविधान के तहत कुमार के खिलाफ दुर्व्यवहार का प्रथम दृष्टया मामला साबित करने के लिए सबूत पेश करने में विफल रहा है.

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाले नोटिस के लिए संविधान के अनुसार लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 हस्ताक्षर अनिवार्य हैं. तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में 12 मार्च को प्रस्तुत किए गए नोटिसों में विपक्ष के पास लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 हस्ताक्षर थे. विपक्ष ने कुमार पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है और साथ ही विशेष गहन संशोधन विधेयक को लेकर भी उनकी आलोचना हो रही है.

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