राष्ट्रपति का पद संभालते ही ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर अनाप-शनाप टैक्स लगाया। इससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई। कई देशों ने अमेरिकी दबाब में एकतरफा ट्रेड डील भी किए लेकिन अब यह पूरा फैसला ट्रंप के लिए सेल्फ गोल्फ साबित हो रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को गलत बताते हुए रद्द करने का फैसला सुनाया गया। इसके बाद अब ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी व्यापारियों को अरबों डॉलर का टैरिफ लौटाना शुरू कर दिया है. नीतिगत मामलों पर ये ट्रंप की बड़ी हार है.
यह उन अरबों डॉलर को वापस करने की दिशा में पहला व्यावहारिक कदम है, जिन्हें अब अमान्य हो चुके शुल्कों के तहत वसूला गया था। अमेरिकी आयातकों से जो टैरिफ ट्रंप प्रशासन ने वसूला था, उसे पाने के लिए अमेरिकी आयातक और ब्रोकर ऑनलाइन आवेदन भर रहे हैं. ट्रंप ने टैरिफ तो लगा दिया था लेकिन कानून की कसौटी पर टैरिफ लगाने का ट्रंप का फैसला सही साबित नहीं हुआ. ट्रंप प्रशासन ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act, 1977) का इस्तेमाल करके टैरिफ लगाए थे.
अमेरिकी सरकार ने पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू की
अमेरिकी सरकार ने अरबों डॉलर के टैरिफ वापस करने की एक लंबे समय से इंतजार की जा रही प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। यह कदम तब उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए शुल्कों को रद्द कर दिया था। US Customs and Border Protection (CBP) द्वारा लॉन्च किए गए एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आयातक सोमवार सुबह से ही अपने दावे (claims) फाइल करना शुरू कर सकते हैं। यह प्रक्रिया अमेरिका के इतिहास में टैरिफ वापसी का अब तक का सबसे बड़ा अभियान साबित हो सकती है.
जिन कंपनियों, आयातकों को ट्रंप सरकार से टैरिफ रिफंड चाहिए उन्हें उन सामानों की पहचान करते हुए घोषणाएं दाखिल करनी होंगी, जिन पर उन्होंने आयात कर चुकाए थे. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार मंज़ूर किए गए दावों का रिफ़ंड 60 से 90 दिनों के भीतर मिलने की उम्मीद है, हालांकि तकनीकी और प्रक्रियागत चुनौतियों के कारण इस प्रक्रिया में ज़्यादा समय भी लग सकता है. सरकार रिफ़ंड को अलग-अलग चरणों में जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें हाल ही में चुकाए गए टैरिफ भुगतानों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी.
अदालती फाइलिंग से पता चलता है कि 3,30,000 से अधिक आयातकों ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट पर अनुमानित $166 बिलियन का टैरिफ चुकाया था. रिफंड के लिए अमेरिकी सरकार बारीकी से सभी दावों की जांच कर रही है.
क्या भारत के व्यापारी इस वापसी के हकदार हैं?
भारत के एक्सपोर्टर्स इस टैरिफ रिफंड के सीधे हकदार नहीं हैं. यह रिफंड केवल Importer of Record यानी उन अमेरिकी कंपनी या यूनिट्स को दिया जाएगा जो US Customs and Border Protection (CBP) के पास एंट्री फाइल करती थीं और टैरिफ का पेमेंट सीधे करती थीं. भारत से सामान निर्यात करने वाले ज्यादातर भारतीय व्यापारी FOB (Free on Board) या CIF (Cost, Insurance, Freight) टर्म्स पर शिपमेंट करते हैं, जिसमें अमेरिकी खरीदार ही Importer of Record होता है. टैरिफ का बोझ अमेरिकी इंपोर्टर पर पड़ता था, इसलिए रिफंड भी उसी को जाएगा.
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