कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अस्पताल से लापता हुए किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है तो उसकी पत्नी मुआवजे की मांग करने की हकदार है।
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मेडिकल अस्पताल से मरीज के लापता का मामला
मामला जबलपुर की रहने वाली प्रीति विश्वकर्मा से जुड़ा है। जिनके पति को इलाज के लिए जबलपुर के शासकीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से वे अचानक लापता हो गए। पति का कहीं पता न चलने पर प्रीति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई लेकिन जब पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दायर की।
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अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़ा थाना पुलिस को तत्काल प्रीति के पति को तलाशने के आदेश दिए। पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए वे चौंकाने वाले रहे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि प्रीति के पति की मृत्यु हो चुकी है। जिसमें सबसे गंभीर बात यह रही कि अस्पताल प्रबंधन ने मृत्यु के अगले ही दिन परिजनों को बिना सूचित किए शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी
मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगल पीठ ने अस्पताल और प्रशासन की लापरवाही को गंभीर माना। उन्होंने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह अपने पति की मृत्यु के बदले मुआवजे के लिए कानूनी दावा पेश कर सकती है।
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