मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को मृतक अंडरवर्ल्ड डॉन  इकबाल मिर्ची और उसके परिवार से जुड़ी अतिरिक्त संपत्तियों को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स (FEO) एक्ट, 2018 के तहत अटैच करने की अनुमति दे दी। बुधवार को पारित आदेश में अदालत ने ED को FEO एक्ट की धारा 5(1) के तहत एग्ज़िबिट ‘C’ में वर्णित संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति दी।

एजेंसी का मानना है कि ये संपत्तियां अवैध कमाई से जुड़ी हैं। कोर्ट की मंजूरी के बाद ED की कार्रवाई और तेज होगी और मिर्ची से जुड़े आर्थिक मामलों में शिकंजा और कसा जाएगा।

मुंबई कोर्ट ने ईडी को इकबाल मिर्ची और परिवार की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच करने की अनुमति दे दी है. इन संपत्तियों में मुंबई के वर्ली की प्राइम लैंड और दुबई के रियल एस्टेट यूनिट्स शामिल हैं. इसके अलावा दुबई में कुछ संपत्तियां शामिल हैं. इनकी खरीद अपराध से अर्जित धन से की गई थी. ईडी ने बताया कि मिर्ची को 2021 में ही फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया गया था.

साथ ही अदालत ने धारा 13 के तहत सप्लीमेंट्री आवेदन दाखिल करने की भी अनुमति दी, ताकि जांच के दौरान सामने आई अन्य संपत्तियों को भी शामिल किया जा सके. यह आवेदन ED के मुंबई जोनल ऑफिस-I की ओर से दाखिल किया गया था. एजेंसी ने अदालत को बताया कि ये संपत्तियां आगे की जांच में सामने आई हैं और पहले से ही PMLA के तहत चल रही अटैचमेंट कार्रवाई का हिस्सा हैं.

इन संपत्तियों में मुंबई के वर्ली इलाके की तीन प्राइम जमीनें- राबिया मेंशन, मरियम लॉज और सी व्यू शामिल हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 4,970.41 वर्ग मीटर बताया गया है. इसके अलावा दुबई स्थित संपत्तियां, जिनमें होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और कॉर्पोरेट बे व DEC टावर्स की 14 रियल एस्टेट यूनिट्स शामिल हैं.

ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि इकबाल मिर्ची ने 1986 में अपनी फर्म M/s Rockside Enterprises के जरिए वर्ली की ये संपत्तियां 6.5 लाख रुपये में खरीदी थीं और बाद में ट्रस्ट व डमी किरायेदारों के जरिए वास्तविक स्वामित्व छिपाया गया। आगे यह भी आरोप लगाया गया कि वाधवान बंधुओं द्वारा वर्ली की संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए 154 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भेजी गई थी, और दुबई की अन्य संपत्तियां भी इसी वित्तीय लेन-देन का हिस्सा थीं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इन संपत्तियों को 2019 और 2020 में PMLA के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया जा चुका था, जिसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी पुष्टि दी थी. आखिकार अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि ED को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए FEO एक्ट की धारा 5(1) के तहत इन संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति दी जाती है।

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