यूपी-रेरा ने रियल एस्टेट से जुड़े सामान्य नियमों को एक जगह कर बिल्डरों, घर खरीदारों और एजेंटों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. गाइडलाइन में प्रोजेक्ट की जानकारी, शिकायत, रिपोर्ट, बैंक खातों और शुल्क से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए हैं.
सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश में घर या प्लॉट खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। यूपी-रेरा ने रियल एस्टेट से जुड़े सभी सामान्य नियमों को एक जगह कर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। गाइडलाइन के मुताबिक बिल्डरों, घर खरीदारों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि उन्हें किन नियमों का पालन करना होगा.
यूपी-रेरा की तरफ से जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार, अब बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। खरीदारों से संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर और संपर्क नंबर या टोल-फ्री नंबर भी देना होगा.
साथ ही प्रोजेक्ट की हर तीन महीने की प्रगति रिपोर्ट भी जरूरी प्रमाणपत्रों के साथ जमा करनी होगी। वहीं बिल्डर को यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल भी अपडेट रखनी होगी। कंपनी के निदेशक, साझेदार या ट्रस्टी, वित्तीय जानकारी और आयकर रिटर्न जैसी जानकारियों में बदलाव होने पर उसे वेबसाइट पर अपडेट करना होगा.
शिकायत के लिए अलग ई-मेल
गाइडलाइन में कहा गया है कि बिल्डरों को अलग-अलग काम के लिए चार ई-मेल आईडी देनी होंगी। इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रशासनिक काम, खरीदारों की शिकायत और आवंटियों व एजेंटों से संपर्क के लिए अलग ई-मेल होंगे.
इससे शिकायतों और जरूरी सूचनाओं को सही जगह पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रोजेक्ट का नाम वही रखना होगा जो स्वीकृत नक्शे में दर्ज है.
कब्जे के समय ऑफर
गाइडलाइन के मुताबिक, कब्जा देते समय भी बिल्डर को यूपी-रेरा के तय प्रारूप में Offer of Possession देना होगा। इससे कब्जे के समय भुगतान और अन्य औपचारिकताओं में पारदर्शिता बढ़ेगी.
गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर किसी खरीदार ने ऐसे प्रोजेक्ट में घर खरीदा है जो यूपी-रेरा में पंजीकृत नहीं है, तब भी वह ऑनलाइन शिकायत कर सकेगा.
रिपोर्ट देर से जमा की तो शुल्क
बिल्डर और एजेंट को रिपोर्ट समय पर जमा करनी होगी। देरी होने पर शुल्क देना पड़ेगा। तिमाही प्रगति रिपोर्ट देर से जमा करने पर 15 हजार रुपये, सालाना ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर 25 हजार रुपये और एजेंट की तिमाही रिपोर्ट देर से जमा करने पर 10 हजार रुपये लेट फीस तय की गई है.
इसके साथ ही आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट या प्लॉट परिवार के सदस्य के नाम ट्रांसफर करने पर 1,000 रुपये शुल्क लगेगा। परिवार से बाहर किसी व्यक्ति के नाम ट्रांसफर होने पर अधिकतम 25 हजार रुपये शुल्क लिया जा सकेगा.
बिल्डर के लिए तीन बैंक खाते
गाइडलाइन के अनुसार, प्रोजेक्ट के पैसे को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। बिल्डर को तीन अलग-अलग बैंक खाते रखने होंगे—कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट.
खरीदारों से कलेक्शन अकाउंट में आने वाली रकम का 70 प्रतिशत सेपरेट अकाउंट और 30 प्रतिशत ट्रांजेक्शन अकाउंट में जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े लोन की रकम भी सेपरेट अकाउंट में रखी जाएगी.
इन खातों का हर वित्तीय वर्ष में ऑडिट कराना होगा और रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी.


