नई दिल्ली। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ‘ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026’ में पाकिस्तान 145 अर्थव्यवस्थाओं में 143वें स्थान पर है। इसने अपने जेंडर गैप का 59.5% हिस्सा कम किया है, जिससे यह नीचे से तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की तुलना में इसके स्कोर में 2.8 प्रतिशत अंकों का सुधार हुआ है, जो पिछले एक दशक में देश का सबसे बड़ा सालाना सुधार है।

WEF इंडेक्स चार क्षेत्रों में जेंडर समानता (gender parity) को मापता है — आर्थिक भागीदारी और अवसर, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य और जीवन रक्षा, और राजनीतिक सशक्तिकरण।

2006 में पाकिस्तान का कुल स्कोर 54.3% था, जो अब 5.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 59.5% हो गया है। WEF ने कहा कि यह हालिया सुधार मुख्य रूप से शिक्षा के स्तर में हुई बढ़ोतरी के कारण हुआ है।

वर्कफोर्स में महिलाएं पुरुषों से काफी पीछे

आर्थिक भागीदारी पाकिस्तान का सबसे कमजोर क्षेत्र बना हुआ है; देश ने इसमें 36.4% स्कोर किया और वैश्विक स्तर पर 144वें स्थान पर रहा। लेबर-फोर्स भागीदारी में समानता का स्तर 34.6% था, जबकि महिला विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों की हिस्सेदारी 6.5% और पेशेवर व तकनीकी कर्मचारियों में उनकी हिस्सेदारी 44.9% थी।

अनुमानित कमाई में समानता का स्तर 26.3% था। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि वरिष्ठ नेतृत्व और बिजनेस के मालिकाना हक में महिलाओं की हिस्सेदारी सीमित रही।

शिक्षा से सुधार

पाकिस्तान ने शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया और समानता स्कोर 91.7% तक पहुंच गया, जो पिछले संस्करण की तुलना में छह प्रतिशत अंक से अधिक है।

WEF ने कहा कि 2006 के बाद से शिक्षा में समानता 21 प्रतिशत अंक सुधरी है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा (tertiary) में नामांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे शिक्षा 2026 इंडेक्स में पाकिस्तान के समग्र सुधार का मुख्य कारक बन गई।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम

राजनीतिक सशक्तिकरण में पाकिस्तान ने 14.1% स्कोर किया और वैश्विक स्तर पर 107वें स्थान पर रहा। हालांकि संसदीय और मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधित्व में समानता पिछले संस्करण की तुलना में बेहतर हुई, लेकिन दोनों क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम बना रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 21.69% थी, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 78.31% थी। मंत्रियों के पदों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ़ 3.45% थी, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 96.55% थी।

पाकिस्तान को उस समय-सीमा के आधार पर भी स्कोर मिला जब कोई महिला देश की प्रमुख रही थी; रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 50 सालों में से 4.73 साल तक देश की बागडोर एक महिला प्रमुख के हाथ में रही थी।

कानूनी अधिकारों में अंतर

रिपोर्ट के संदर्भ-संबंधी संकेतकों ने महिलाओं के कानूनी और आर्थिक अधिकारों में असमानता को भी उजागर किया। इसमें पाया गया कि विधवाओं और बेटियों को विरासत (संपत्ति) के मामले में समान अधिकार नहीं थे और न्याय पाने के अधिकारों पर भी पाबंदियां थीं। वित्तीय सेवाओं और संपत्ति तक पहुंच के मामले में महिलाओं के अधिकार लगभग पुरुषों के बराबर पाए गए, जबकि तलाक और प्रजनन संबंधी स्वतंत्रता (रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी) के मामले में उनके अधिकार सीमित थे।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि 24.9% महिलाओं ने अपने जीवनकाल में लिंग-आधारित हिंसा का सामना किया था।

भारत

भारत में जेंडर पैरिटी (लैंगिक समानता) की दिशा में प्रगति 64.5% है। व्यक्तिगत स्कोर में थोड़ी बढ़ोतरी के साथ, भारत ग्लोबल रैंकिंग में 131वें स्थान पर बना हुआ है। 2006 के बाद से जेंडर पैरिटी की दिशा में इसकी कुल बढ़त +4.3 प्रतिशत-अंक रही है, जो मुख्य रूप से शिक्षा के स्तर (Educational Attainment) में सुधार के कारण है।

बांग्लादेश

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 में बांग्लादेश 79वें स्थान पर है और इसने अपने जेंडर गैप को 71.2% तक कम कर लिया है। पिछले साल की तुलना में, बांग्लादेश के स्कोर में सबसे बड़ी गिरावट (-6.2 प्रतिशत-अंक) दर्ज की गई है। इसके बावजूद, 2006 से बांग्लादेश ने सकारात्मक प्रगति की है, जिससे यह अपनी शुरुआती स्थिति से +8.5 प्रतिशत-अंक आगे है।

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