रांची। रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘रेगुलेशन एंड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्यूर फॉर द मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसिड्यूर फॉर अवार्ड ऑफ पीएचडी डिग्री-2026’ की अधिसूचना जारी कर दी है। नया रेगुलेशन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अब पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।

कुलपति प्रो. सरोज शर्मा के निर्देशन और सोशल साइंस डीन सह रिसर्च डायरेक्टर डॉ. परवेज हसन की देखरेख में गठित कमेटी ने यूजीसी रेगुलेशन-2022 के अनुरूप नए नियम तैयार किए हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक, नई शिक्षा नीति और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए रेगुलेशन तैयार किया गया है।

पीएचडी के लिए 55 फीसदी अंक जरूरी

नए नियम के अनुसार पीएचडी में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का संबंधित विषय में स्नातकोत्तर स्तर पर कम से कम 55 प्रतिशत अंक होना जरूरी होगा। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

पीएचडी पूरी करने के लिए न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम अवधि 6 वर्ष निर्धारित की गई है। विशेष परिस्थितियों में दो वर्ष का अतिरिक्त विस्तार दिया जा सकेगा, जिसके बाद अधिकतम अवधि 8 वर्ष तक हो सकती है। महिला अभ्यर्थियों के लिए भी नियमों के तहत विशेष प्रावधान किए गए हैं।

एक प्रोफेसर करा सकेंगे 8 शोधार्थियों को PhD

नए रेगुलेशन में शोधार्थियों और गाइड की संख्या को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। इसके तहत एक प्रोफेसर एक समय में अधिकतम 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 शोधार्थियों का निर्देशन कर सकेंगे।

यदि किसी शोधार्थी के गाइड की सेवा अवधि के दौरान सेवानिवृत्ति हो जाती है, तो वे गाइड के बजाय को-गाइड की भूमिका में रह सकेंगे। वहीं, नियमों के अनुसार शोधार्थी को गाइड बदलने का विकल्प भी मिलेगा।

पिछली बार राज्यपाल ने लगाई थी प्रवेश परीक्षा पर रोक

रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी रेगुलेशन के स्वीकृत नहीं होने के कारण पिछली बार आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा पर राज्यपाल की ओर से रोक लगा दी गई थी। विश्वविद्यालय को यूजीसी रेगुलेशन-2022 के अनुरूप नया नियम तैयार करने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन मंगाए गए थे और अभ्यर्थियों से प्रति आवेदन 2,000 रुपये शुल्क लिया गया था। परीक्षा पर रोक लगने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को यह राशि अभ्यर्थियों को वापस करनी पड़ी थी।

13 सदस्यीय कमेटी ने तैयार किया नया रेगुलेशन

नए पीएचडी रेगुलेशन को तैयार करने के लिए कुलपति प्रो. सरोज शर्मा के निर्देशन में 13 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों के साथ रांची यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षक शामिल थे।

कमेटी के अध्यक्ष निपा, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. पीके मिश्रा थे। इसके अलावा गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान और हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने रेगुलेशन तैयार करने में योगदान दिया।

नए नियम लागू होने के बाद अब रांची यूनिवर्सिटी में 2026-27 सत्र से पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अभ्यर्थियों की नजर अब विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश परीक्षा और आवेदन से जुड़ी अगली अधिसूचना पर है।