अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। ऐतिहासिक धरोहर शेरशाह सूरी के मकबरे के पास स्थित तालाब एक बार फिर बड़ी लापरवाही और बदहाली का शिकार बन गया है। इस तालाब में भारी मात्रा में मछलियां के मरने से सनसनी फैल गई है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण यहां मछली पालने वाले संवेदकों को एक बार फिर लाखों रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है।
पानी के दूषित होने से हुआ बड़ा हादसा
तालाब में मछली पालन करने वाले संवेदक एवं मछुआरा दीना चौधरी ने दर्द साझा करते हुए बताया कि इस बार लगभग 8 से 10 क्विंटल मछलियां अचानक मर गई हैं। बाज़ार मूल्य के हिसाब से इस क्षति की कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपये आंकी जा रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि पिछले एक साल के भीतर तालाब में तीन से चार बार इस तरह बड़े पैमाने पर मछलियां मर चुकी हैं। इससे उनका पूरा व्यवसाय संकट में आ गया है।



ठप पड़ा वाटर आउटलेट सिस्टम बना मुख्य कारण
मछुआरे दीना चौधरी के अनुसार, इस तबाही की मुख्य वजह तालाब के जल निकासी और जलापूर्ति तंत्र का पूरी तरह ठप होना है। पहले नहर के माध्यम से तालाब में ताज़ा और साफ पानी लगातार आता रहता था, जबकि गंदा पानी दूसरे रास्ते से बाहर निकल जाता था। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पूरा सिस्टम पिछले कई सालों से पूरी तरह खराब और बंद पड़ा है। नतीजतन, तालाब का पानी एक ही जगह पर ठहरकर पूरी तरह दूषित और जहरीला हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियां दम तोड़ने लगती हैं।
ASI और पर्यटकों की बढ़ी मुश्किलें
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के सहायक संरक्षक अमृत झा ने फोन पर जानकारी दी कि तालाब का पानी समय पर फिल्टर या सर्कुलेट न होने के कारण यह समस्या बार-बार उत्पन्न हो रही है। इस घटना से न केवल स्थानीय मछुआरों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है, बल्कि तालाब के पानी से उठने वाली बदबू और गंदगी के कारण यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐतिहासिक महत्व के इस स्थल पर इस तरह की व्यवस्था का फेल होना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

